गाजीपुर : आर्य समाज ने मनाया ऋषि बोधोत्सव
इस मौके पर ब्रह्म यज्ञ एवं देव यज्ञ, भजनोपदेशक अभिमन्यु ने सुंदर भजन प्रस्तुत किया

गाजीपुर। नगर के चीतनाथ स्थित आर्य समाज मंदिर परिसर में ऋषि दयानंद बोधोत्सव यज्ञ, भजन और सत्संग के रूप में मनाया गया। जिले के सभी आर्य समाजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्म यज्ञ एवं देव यज्ञ से आर्य समाज के भजनोपदेशक अभिमन्यु ने सुंदर भजन प्रस्तुत किया। डी.ए.वी इंटर कॉलेज गाजीपुर के आचार्य डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि मूलशंकर से दयानंद सरस्वती बनने की कहानी प्रारंभ होती है। शिवरात्रि की उस घटना से जिसमें शिवलिंग पर चढ़े हुए प्रसाद को चूहों द्वारा खाया जा रहा था। यहीं से बालक मूल शंकर के मस्तिष्क में ईश्वर के मूल स्वरूप को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई और उन्होंने घर छोड़ दिया और पूर्णतः ब्रह्मचारी रहने का संकल्प लिया। पूर्णानंद सरस्वती से संन्यास की दीक्षा ली ,तदुपरांत मथुरा में दंडी स्वामी विरजानंद सरस्वती से ज्ञान की प्राप्ति किया।स्वामी दयानंद सरस्वती प्रख्यात लेखक, वेदों के विद्वान, संन्यासी ,योगी, आध्यात्मिक नेता, धार्मिक- सुधारक, भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थानवादी ,राष्ट्रभक्त, दार्शनिक ,शिक्षक, समाज- सुधारक, क्रांतिकारी ,विचारक, शिक्षाविद और कर्मयोगी थे। स्वामी दयानंद का शैक्षिक- दर्शन उनकी वैदिक- दर्शन की व्याख्या की प्रतिध्वनि है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दयानंद को ‘आधुनिक भारत का आद्यनिर्माता’ माना। इस अवसर पर अपना वक्तव्य देते हुए द प्रेसीडियम स्कूल के डायरेक्टर एवं प्रख्यात आध्यात्मिक प्रवक्ता माधव कृष्ण ने कहा कि दयानंद आधुनिक भारत के चिंतक तथा आर्य समाज के संस्थापक थे। उन्होंने’ ‘वेदों की ओर लौटो’ का प्रसिद्ध नारा दिया। उन्होंने कर्म सिद्धांत ,पुनर्जन्म तथा संन्यास को अपने दर्शन के स्तंभ बनाए । सबसे पहले स्वामी जी ने 1876 में ‘स्वराज ‘का नारा दिया, जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इस समय समाज में अविद्या का प्रसार है और हम लोगों को दयानंद जैसे ऋषियों के आर्ष विचारों को सुनना चाहिए और उनका मनन करना चाहिए। आर्ष ग्रन्थ बिना किसी निंदा के सत्य का उद्घाटन करते हैं। आर्य उपप्रतिनिधि सभा के प्रधान तथा डी.ए.वी. इंटर कॉलेज के प्रबंधक आदित्य प्रकाश ने कहा कि महर्षि दयानंद ने तत्कालीन समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों , अंधविश्वासों और रूढ़ियों- बुराइयों व पाखंडों का खंडन किया। सरदार वल्लभभाई पटेल के अनुसार’ भारत की स्वतंत्रता की नींव वास्तव में स्वामी दयानंद जी ने डाली। स्वामी दयानंद जी ने गुरुकुलों की पुनर्स्थापना की और अंग्रेजों के इस षड्यंत्र की भारतीय ज्ञान -विज्ञान पिछड़ा हुआ है ,का मूलोच्छेदन किया। जितने विदेशी भारत आए, उन्होंने भारत से ज्ञान- विज्ञान, संपत्ति, समृद्धि सबको लूटा। इस अवसर आर्य समाज के प्रचार मंत्री संतोष कुमार वर्मा, डी.ए.वी इंटर कॉलेज के अंग्रेजी प्रवक्ता श्री आशुतोष कुमार मिश्रा और विद्यालय के वरिष्ठ लिपिक श्री संजय मिश्रा ने भी अपने विचार रखे। इस कार्यक्रम में आर्य समाज के प्रधान दिलीप वर्मा, मंत्री धर्मेंद्र कुमार जायसवाल, कोषाध्यक्ष अजय कुमार केसरी, संजय वर्मा, सुरेंद्र नाथ वर्मा ,विजय वर्मा, उदय भान, मनोज जायसवाल, जवाहरलाल, सौरभ, अगम, राकेश जायसवाल, रवींद्रनाथ आदि की गरमामयी उपस्थिति रही।



