सिया के लेके जा हो पिया, राम के शरण में गाकर डाॅ.विद्या निवास पाण्डेय ने किया मंत्रमुग्ध

गाजीपुर : साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ के अन्तर्गत कवि-गोष्ठी एवं गीत-संगीत का कार्यक्रम लोकगीत गायक रामअलम सिंह मधुर के बिठौरा गाँव स्थित उनके आवास पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीता गुरुकुल फाउण्डेशन मिशिगन,अमेरिका के संस्थापक योगी आनन्द जी एवं संचालन संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ संजय पाण्डेय की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद कवियों एवं गायकों द्वारा प्रस्तुत गीत-संगीत की रसधार में श्रोता रससिक्त होते रहे।
दो चरणों में सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम के प्रथम चरण में कवि-गोष्ठी हुई।युवा शायर गोपाल गौरव ने ‘हुस्न जब इश्क में उतर जाए,जिन्दगी आपकी संवर जाए’ सुनाकर श्रोताओं की ढेर सारी वाहवाही लूटी।सुपरिचित गजलकार नागेश मिश्र ने ‘कुछ दिल की,कुछ दुनियाँ के नजारे होते हैं/शेर सिर्फ अल्फाज नहीं इशारे होते हैं’ सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं।युवा व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव की पंक्तियाँ ‘मन की खुलती गाँठों का सिर्फ सरल अनुवाद हूँ मैं’ बहुत सराही गईं।वरिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी अमर ने ‘जाऊँ विदेश तो किस देश,बहुत सोचा दिमाग दौड़ाया, अंत में अपना देश ही भाया’ सुनाकर श्रोताओं को गुदगुदाया।कन्हैया गुप्त विचारक एवं डाॅ.शशांक शेखर पाण्डेय ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामयिक परिदृश्य का यथार्थ चित्रण किया।
द्वितीय चरण में गायकों द्वारा सुर,लय व ताल की बहाई त्रिवेणी में श्रोता डुबकी लगाते रहे।डाॅ.विद्या निवास पाण्डेय ने सीता हरण के बाद मंदोदरी द्वारा रावण को समझाने के प्रसंग को ‘सिया के लेके जा हो पिया राम के शरण में,पईंया पड़ीलां बार-बार’ की सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति की।रामअलम सिंह मधुर ने ‘जेकर घर ना भेंटाइल भटकाव में,ए गली ओ गली में धइबे करी ‘ सुनाकर सभी को आनन्दित किया।संजय कुमार पाण्डेय ने भजन सुनाकर सभी को झूमने के लिए विवश कर दिया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी,विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व जिलाध्यक्ष बिनोद उपाध्याय,हिमांशु राय,अशोक मिश्र,गुरु प्रताप सिंह,आशुतोष सिंह,हरेन्द्र सिंह,राम प्रताप सिंह,रामाशीष प्रजापति,संतोष सिंह उमेश प्रजापति आदि उपस्थित थे।कार्यक्रम के अंत में रामअलम सिंह मधुर ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।



