श्री श्री रवि शंकर की दिव्य उपस्थिति में हुआ शिव तत्त्व का परम उत्सव

अशोक कुमार मिश्र
लखनऊ: श्री श्री रवि शंकर की दिव्य उपस्थिति में पूरे विश्व में शिव तत्त्व का परम उत्सव मनाया गया। लखनऊ में भी आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वाधान में भव्य उत्सव मनाया गया।
आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र इस वर्ष अद्वितीय आध्यात्मिक उत्साह और भव्यता के साथ महाशिवरात्रि का आयोजन किया। 180 से अधिक देशों से लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर एकत्रित होंगे, जहाँ वे ध्यान, पावन रुद्र होम, भावविभोर कर देने वाले भजन तथा गहन आंतरिक मौन से परिपूर्ण एक दिव्य संध्या का अनुभव करेंगे।

वैदिक परंपरा की अत्यंत पवित्र रात्रियों में से एक महाशिवरात्रि, गहन विश्राम, जाग्रत चेतना और आंतरिक रूपांतरण का अनुपम अवसर प्रदान करती है।
गुरुदेव आगे कहते हैं, सुख के पीछे भागते-भागते व्यक्ति थक जाता है। जब आप कुछ समय अपने आत्मस्वरूप में विश्राम करते हैं, तो आप पुनः ऊर्जा प्राप्त करते हैं, और वही ऊर्जा आपको शक्ति, आनंद और प्रसन्नता प्रदान करती है। वर्ष की कुछ रात्रियाँ विशेष रूप से शुभ और अनुकूल मानी गई हैं, जो आपको इस विश्रांति का अवसर देती हैं। महाशिवरात्रि उसी गहन विश्राम की अवस्था में प्रतिष्ठित होने का पर्व है।”
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रुद्र पूजा था, जो भगवान रुद्र—भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप—की उपासना हेतु गुरुदेव की दिव्य उपस्थिति में संपन्न किया गया। रुद्र पूजा शिव की रूपांतरणकारी ऊर्जा का आह्वान करती है, जो नकारात्मकता के क्षय और उच्च चेतना के जागरण का प्रतीक है। ‘श्री रुद्रम’ के प्राचीन वैदिक मंत्रों पर आधारित यह अनुष्ठान वातावरण की शुद्धि, सामूहिक चेतना के उत्थान तथा व्यक्ति और समाज के लिए शांति, समृद्धि और कल्याण का साधन माना जाता है। भारत के 150 से अधिक स्थलों पर भी रुद्र पूजा का आयोजन किया गया, जिससे लाखों श्रद्धालु अपने-अपने नगरों में इस पावन अनुष्ठान की आध्यात्मिक तरंगों का अनुभव किए। एक ही आकाश के नीचे, एक ही चेतना में डूबे दस लाख से अधिक श्रद्धालु; चारों ओर गहन निस्तब्धता, और उस मौन के मध्य विश्वविख्यात आध्यात्मिक मार्गदर्शक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की दिव्य आभा में सम्पन्न होती एक अत्यंत प्रभावशाली ध्यान-साधना। पावन महाशिवरात्रि की इस रात्रि में यह दृश्य मानो अलौकिक अनुभूति का साक्षात रूप बन गया।



आर्ट ऑफ लिविंग के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित इस भव्य महोत्सव के समापन के साथ ही श्रद्धालु अपने साथ एक अविस्मरणीय, आत्मानुभूति से परिपूर्ण संध्या की स्मृतियाँ लेकर लौटे; जहाँ आत्मा को स्पंदित कर देने वाला संगीत, गुरुदेव के सान्निध्य में रूपांतरकारी ध्यान-सत्र तथा वैदिक अनुष्ठानों की मंगलध्वनियाँ वातावरण को पवित्रता, आनंद और उत्सवमयी चेतना से भर रही थीं।
इस अवसर पर गुरुदेव ने कहा, “महाशिवरात्रि वह अवसर है जब आत्मा भौतिक जगत से ऊपर उठकर किसी सूक्ष्म, दिव्य लोक का स्पर्श करती है। शिव प्रत्येक कण में विद्यमान हैं। हमारी चेतना का स्वभाव ही शिव है। शिव में निमग्न होना भक्ति है, और प्रत्येक में शिव को देखना सेवा है। जो अविनाशी है, वह हमारे भीतर ही है। यदि हमें इतना भी विश्वास हो जाए, तो जीवन में किसी अभाव का स्थान नहीं रहता। कहा जाता है कि जो प्रेम और श्रद्धा से शिवरात्रि का अनुष्ठान करता है, उसकी सभी कामनाएँ स्वयं ही पूर्ण हो जाती हैं।”महाकाल की अभिव्यक्ति पर उन्होंने कहा, “वह योगियों के हृदय में ज्योति बनकर प्रकाशित होते हैं।”
संध्या का केन्द्रीय आकर्षण, शिव के कल्याणकारी स्वरूप भगवान रुद्र,को समर्पित एक शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान, पावन रुद्र पूजा था। श्री रुद्रम के प्राचीन वैदिक मंत्रों पर आधारित यह पूजा शिव की रूपांतरणकारी ऊर्जा का आह्वान करती है, जो नकारात्मकता के क्षय और उच्चतर चेतना के जागरण का प्रतीक है। मान्यता है कि यह अनुष्ठान वातावरण को शुद्ध करके सामूहिक चेतना को उन्नत करता है तथा समाज में शांति, समृद्धि और मंगल का संचार करता है। यह रुद्र पूजा भारत सहित कनाडा, दुबई, जर्मनी और विश्व के 150 से अधिक अन्य स्थलों पर भी एक साथ संपन्न हुई।



