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मऊराजनीति

मऊ : UGC ड्राफ्ट को लेकर सवर्ण समाज में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

सतीश कुमार पांडेय
मऊ।UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के हालिया ड्राफ्ट को लेकर सवर्ण समाज में असंतोष गहराता जा रहा है। अधिवक्ता सतीश कुमार पाण्डेय ने इस ड्राफ्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रस्तावित प्रावधानों के जरिए सामान्य वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें कानूनी व सामाजिक रूप से कमजोर स्थिति में धकेलने की कोशिश की जा रही है।
सतीश कुमार पाण्डेय का कहना है कि जिस तरह SC/ST एक्ट में कठोर प्रावधान हैं, उसी तर्ज पर यदि अब OBC वर्ग द्वारा सामान्य वर्ग पर आरोप लगाए जाने की स्थिति में भी वही सख्ती लागू की जा रही है, तो यह शिक्षा संस्थानों में सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के लिए जीवनभर का संकट बन सकता है। उन्होंने दावा किया कि इससे कॉलेज के भीतर ही नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन में भी व्यक्ति पूरी तरह बर्बाद हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि SC/ST एक्ट में पहले 22 कारणों की सूची थी, जिसे बढ़ाकर 47 कर दिया गया, फिर भी इसका लाभ कुछ वर्गों को नहीं मिला। अब वही सोच UGC ड्राफ्ट में भी लागू की जा रही है। पाण्डेय ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे सामान्य वर्ग के सामने आत्महत्या या देश छोड़ने जैसी परिस्थितियां खड़ी की जा रही हैं। अधिवक्ता पाण्डेय ने राजनीतिक नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनाए जाने की चर्चा के बीच कथित रूप से वैचारिक भ्रम फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित धर्मगुरुओं और सवर्ण नेताओं को चुप कराकर नीति- निर्माण में अपने पक्ष के लोगों को आगे रखा गया है, विशेषकर UGC ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में।उन्होंने यह भी कहा कि जब अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, तो सुनवाई के लिए दो महीने बाद की तारीख दी गई, जिससे सवर्ण समाज में निराशा और आक्रोश और बढ़ा है। सतीश कुमार पाण्डेय ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में अनिल मिश्रा और उत्तर प्रदेश में राजा भैया जैसे कुछ नेताओं ने ही अब तक UGC ड्राफ्ट के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है, जबकि अधिकांश सवर्ण नेता मौन हैं। अंत में उन्होंने सवर्ण समाज से अपील की कि यदि समय रहते एकजुट होकर आंदोलन नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की बात कही।

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