
मऊ।स्कूल चलो अभियान का पहला फेज 15 अप्रैल को बीत गया है किन्तु सरकारी स्कूलों में नामांकन की टेढ़ी प्रक्रिया ने शिक्षकों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। जिसकी वजह से नामांकन में गिरावट आ रही है। आलम यह है कि नामांकन में वृद्धि नहीं हो पा रही है। हलांकि शिक्षक नामांकन बढ़ाने के लिए विभागीय दिशानिर्देश पर प्रयास जरूर कर रहे हैं।
परिषदीय विद्यालयों में नामांकन के लिए जन्म प्रमाण पत्र /आधार आवश्यक है। तभी बच्चों का नाम पोर्टल पर अपलोड होता है। और उन्हें सरकार द्वारा दी जानेवाली 1200रूपये की राशि डी. बी. टी. के माध्यम से मिलती है।पहले सम्बंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा संस्तुति की जाती थी तो आधार बन जाता था। जिससे अभिभावक को भौग-दौड़ से राहत रहती थी।
किन्तु वर्तमान दौर में आधार बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। अभिभावक को कुटुंब रजिस्टर की नकल लेनी होगी, प्रार्थना पत्र, निवास प्रमाण पत्र,शपथपत्र सम्बन्धित तहसील के एस. डी. एम. कार्यालय में पंजियन व संस्तुति, पुन:विकासखंड कार्यालय को रीफर। तदुपरांत एस. डी. एम. कार्यालय को रीफर। तदुपरांत जरूरी नहीं है कि जन्म प्रमाण पत्र बन ही जाय। एक पखवाड़े से महीनों से भी ऊपर का समय लग जाता है।पत्रावली बिना सुविधा शुल्क लिए टस से मस नहीं होती है। ऐसे में गरीब असहाय अभिभावक अपने पाल्यों को स्कूल में कैसे दाखिला करायें, यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
ऐसे में 6-14आयु वर्ग के बच्चों का नामांकन प्रभावित है। इतने के बावजूद जिले के आला अधिकारी उदसीन बने हुए हैं। यदि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी व लेखपाल गाँवों में कैम्प करके यह कार्य करते तो जन्म प्रमाण पत्र आसानी से बन जाता। गाँव के गरीब असहाय लोगों को दर-दर भटकना नहीं पड़ता। इससे सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्कूल चलो अभियान को गति मिलती।
रिपोर्ट – सतीश कुमार पांडेय




