आजमगढ़: विदेश में घर और आजमगढ़ में नौकरी

गोविन्द लाल शर्मा
आजमगढ़।मुबारकपुर स्थित मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुआ था। 2007-08 से वे ब्रिटेन में रहना लगा और 19 दिसंबर 2013 को उसने स्वेच्छा से ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली। फिर भी, 2007 से 2017 तक बिना उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए उसे प्रतिवर्ष वेतन वृद्धि दी जाती रही। आश्चर्यजनक रूप से, 1 अगस्त 2017 को उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देकर पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई, जो पूरी तरह अनियमित पाई गई। एटीएस की रिपोर्ट में इसे सरकारी तंत्र में गंभीर लापरवाही का उदाहरण बताया गया है।
एटीएस की गहन जांच में खुलासा हुआ कि शमशुल हुदा खान मदरसा में नौकरी के दौरान बार-बार विदेश यात्राएं करता रहा। वह पाकिस्तान के कई इलाकों में जाकर वहां के मौलवियों और लोगों से संपर्क बनाता था। भारत लौटकर उसने अपने करीबियों के जरिए जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं और संदिग्ध व्यक्तियों से जुड़ा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेटवर्क इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का प्रयास था। इसके अलावा, वे इंग्लैंड और अन्य देशों से फंड इकट्ठा कर पूर्वांचल के मदरसों तक भेजते थे, जिसमें अपना कमीशन या दलाली भी काटते थे।यह सब विदेशी मुद्रा अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।




