
एआरपी चयन प्रक्रिया में धांधली, डीसी पर लगे पचास हजार से एक लाख रुपए वसूलने के गंभीर आरोप
राकेश चंदेल
सोनभद्र। प्रदेश सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस व भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलाने का दावा करती हो लेकिन सच्चाई यही है कि सरकारी नीतियों को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी ही सरकारी नीतियों की लीपापोती करने में लगे हैं। कुछ ऐसे ही हालात जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में नजर आ रहे हैं। एक ऐसे ही मामले में शिकायती पत्र के माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं जिसकी जांच के क्रम में मंडलीय शिक्षा निदेशक वाराणसी द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पांडेय को पत्र जारी कर स्पष्टीकरण देने को आदेशित किया गया है। बताया गया कि जनपद में पीएम श्री विद्यालयों में बच्चों के लिए डेस्क बेंच खरीद में धांधली की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अपने निकटतम फर्म के द्वारा घटिया किस्म के डेस्क बेंच की खरीद की गई है। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों ने बताया कि उन्हें कार्यालय बुलाकर जबरदस्ती पीपीए जनरेट कराकर भुगतान भी कराया गया। इस कार्य में बेसिक शिक्षा अधिकारी के नजदीकी माने जाने वाले डीसी राजकिशोर वर्मा की काफी भूमिका रही है। यही नहीं इन्हीं विद्यालयों में बच्चों को खेलने के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले खेल सामग्री के मामले में भी अपने नजदीकी फर्म के माध्यम से घटिया खेलकूद सामग्री की खरीदी कर अध्यापकों से पीपीए जनरेट कराकर भुगतान कराया गया। वहीं जनपद में अकादमिक रिसोर्स पर्सन की नियुक्ति के मामले में भी धांधली का आरोप है। एक ओर जहां अपने नजदीकी लोगों को अलग से परीक्षा कराकर चयन की कार्यवाही की गई तो वहीं दूसरी ओर शिक्षकों का कहना है, कि डीसी राजकिशोर वर्मा द्वारा पचास हजार से एक लाख रुपए तक वसूल किए गए। शिक्षकों द्वारा बताया गया कि एआरपी के चयन में साक्षात्कार के नाम पर महज खानापूर्ति ही की गयी और धन न देने वाले योग्य शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हालांकि देखने वाली बात यह है, कि मंडलीय शिक्षा निदेशक वाराणसी की जांच की आंच कहां तक पंहुचती है। लोगों की निगाहें इसी पर टिकी है।




