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दीपोत्सव पर अयोध्या में बिखरी काशी हिंदू विश्वविद्यालय की रचनात्मक उत्कृष्टता की आभा

प्रो. मनीष अरोड़ा और शोधार्थी राहुल कुमार शॉ के डिज़ाइन पर तैयार ‘तिलक द्वार’ बना प्रभु श्रीराम के दिव्य आगमन का प्रतीक

सुशील कुमार मिश्र

वाराणसी।काशी हिंदू विश्वविद्यालय की रचनात्मक उत्कृष्टता का अद्भुत स्वरूप अब अयोध्या में ‘तिलक द्वार’ के रूप में साकार हुआ है। यह भव्य द्वार प्रभु श्रीराम के पवित्र अयोध्या नगरी में विजयी और दिव्य आगमन का प्रतीक है।दृश्य कला संकाय के अपलाइड आर्ट्स विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मनीष अरोड़ा तथा वरिष्ठ शोधार्थी राहुल कुमार शॉ द्वारा परिकल्पित और डिज़ाइन किया गया यह विशाल द्वार हनुमान गुफा मार्ग पर, 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के समीप स्थापित किया गया है।इस विचार की उत्पत्ति वर्ष 2024 में हुई, जब बीएचयू की ऐब्सट्रैक्ट आर्ट टीम ने ग्लोबल डिज़ाइन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसी अवसर पर अयोध्या विकास प्राधिकरण ने राम मंदिर के मुख्य द्वार के लिए डिज़ाइन आमंत्रित किए। बीएचयू की टीम ने दीपोत्सव के भाव को मूर्त रूप देने के विचार पर काम शुरू किया।प्रारंभ में इसे ‘दीप द्वार’ नाम दिया गया था, जिसे बाद में चयन समिति द्वारा ‘तिलक द्वार’ नाम प्रदान किया गया। यह नाम श्रीराम के मस्तक पर अंकित पवित्र तिलक से प्रेरित है, जो धर्म, विजय और मर्यादा का प्रतीक है।द्वार के शीर्ष पर स्थित तीन आलोकित स्तर भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य का प्रतीक हैं। इन सबके ऊपर उगता हुआ सूर्य सत्य की असत्य पर शाश्वत विजय का द्योतक है। वह तेजस्वी प्रकाश जो रघुवंशी परंपरा से उत्पन्न होकर सम्पूर्ण सृष्टि को आलोकित करता है। द्वार के स्तंभों पर शंख, चक्र, गदा और पद्म अंकित हैं।जो भगवान विष्णु के प्रतीक हैं, यह स्मरण दिलाते हुए कि श्रीराम विष्णु के सप्तम अवतार हैं।करुणा,धर्म और न्याय के जीवंत स्वरूप द्वार के मध्य में अंकित पवित्र लेख “राम नाम” यह सार्वभौमिक सत्य उद्घोषित करता है।“राम सबके हैं और सब राम के हैं।
भगवान महादेव, महमना पंडित मदन मोहन मालवीय तथा प्रभु श्रीराम को समर्पित यह अद्वितीय सृजन बीएचयू की सृजनात्मक प्रतिभा,आध्यात्मिक कलात्मकता,भारत की सांस्कृतिक विरासत का उज्ज्वल प्रतीक बनकर अयोध्या में आलोकित हो रहा है।

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