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उत्तर प्रदेशमऊ

मऊ:पोखरी नदारद, हाई कोर्ट के आदेश पर प्रशासन चौकन्ना

गोठा गांव की पोखरी पर अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट सख्त,डीएम व तहसीलदार से तलब किया जवाब,घोसी तहसीलदार ने पोखरी का किया निरीक्षण

सतीश कुमार पांडेय
मऊ। गोठा गांव स्थित एक सार्वजनिक पोखरी पर अतिक्रमण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका के तहत दायर इस मामले में अदालत ने मऊ के जिलाधिकारी और घोसी तहसील के तहसीलदार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2025 को निर्धारित है।
यह विवाद मऊ जनपद की घोसी तहसील के गोठा गांव के गाटा संख्या 932/0.7290 से जुड़ा है, जो राजस्व अभिलेखों में ‘पोखरी’ के रूप में दर्ज है। याचिकाकर्ता प्रवीन कुमार राय ने आरोप लगाया है कि मंडी समिति ने इस सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है।
27 अगस्त 2025 को जारी आदेश के क्रम में घोसी तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार पाण्डेय ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान घोसी तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि गोठा गांव की गाटा संख्या 932, जो राजस्व रिकॉर्ड में ‘पोखरी’ के रूप में दर्ज है, उस पर अतिक्रमण की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय द्वारा मांगे गए उत्तर के क्रम में प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे समयबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।
इस दौरान कानूनगो पारस पासी, लेखपाल सीताराम यादव, सर्वेश कुमार सिंह, स्थानीय निवासी अनूप राय, संजय उपाध्याय, नारद मौर्य, मनोज राय, पवन उपाध्याय, शुभम गुप्ता, मंडी समिति के कर्मचारी व उमाशंकर उपाध्याय (एडवोकेट) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पोखरी से अतिक्रमण हटाने की मांग की है। कोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख 24 सितंबर को तय की गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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