दीपावली खुशियों का पर्व, जानिए कब है पूजा का शुभ मुहूर्त,क्या बरते सावधानियां

By Sub Editor-प्राची राय
दिवाली यानी दीपावली का पर्व हर साल कार्तिक महीने में अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में दिवाली पर्व का बड़ा ही महत्व है। यह धनतेरस से शुरू होने वाले पंचदिवसीय पर्व का प्रमुख त्योहार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके जब अयोध्या लौटे थे तब उनके आगमन की खुशी में दीपावली का त्योहार मनाया गया था। वैसे दिवाली की कई अन्य कथाएं और मान्यताएं हैं। लेकिन सभी कथाओं और मान्यताओं में दिवाली को देवी लक्ष्मी की कृपा पाने का दिन बताया गया है।आइये। जाने कब क्या पड रहा है
18 अक्टूबर शनिवार धनतेरस सोना-चांदी और बर्तन खरीदना यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी अर्थात धन तेरस से प्रारंभ होता है। इस दिन आयुर्वेद के जन्मदाता धन्वंतरि, धन व समृद्धि की देवी लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर,मृत्यु के देवता यमराज और बुद्धि के देवता गणेशजी की पूजा होती है। इस दिन बहिखाता, स्वर्ण, वाहन, बर्तन, धनिया और कपड़े खरीदते हैं।
19 अक्टूबर रविवार नरक चतुर्दशी दीपदान और हनुमान पूजा इस दिन को रूप चौदस भी कहते हैं। इस दिन श्रीकृष्ण ने भौमासुर अर्थात नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से लगभग 16 हजार महिलाओं को मुक्त कराया था। इसी खुशी के कारण दीप जलाकर उत्सव मनाया जाता है। नरक चौदस के दिन प्रातःकाल में सूर्योदय से पूर्व उबटन लगाकर नीम, चिचड़ी जैसे कड़ुवे पत्ते डाले गए जल से स्नान का अत्यधिक महत्व है। इस दिन सूर्यास्त के पश्चात लोग अपने घरों के दरवाजों पर चौदह दीये जलाकर दक्षिण दिशा में उनका मुख करके रखते हैं तथा पूजा-पाठ करते हैं।
20 अक्टूबर सोमवार दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा
नरक चतुर्दशी के बाद अगले दिन अमावस्या को मुख्य त्योहार दीपावली का होता है। इस दिन माता कालिका और लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके बाद पटाखे छोड़े जाते हैं, पकवान बनाकर खाए जाते हैं, मिठाईयां बांटी जाती है और कुछ घरों में इस दिन जुआ भी खेला जाता है। इस दिन असंख्य दीपों की रंग-बिरंगी रोशनियां मन को मोह लेती हैं। दुकानों, बाजारों और घरों की सजावट दर्शनीय रहती है।
दीपावली 2025 का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार, दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। सही समय पर पूजा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
दीपावली पर पूजा विधि
दीपावली की पूजा विधि में विशेष नियमों का पालन किया जाता है। सही विधि से पूजा करने पर सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। पूजा विधि निम्नलिखित है।

साफ-सफाई घर की साफ-सफाई करके मुख्य द्वार और पूजा स्थल को सजाएं।
रंगोली बनाएं और दीये जलाएं।
पूजा सामग्री कलश, नारियल, पान के पत्ते, फूल, चावल, कुमकुम, घी, दीपक, मिठाई।
लक्ष्मी गणेश स्थापना लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियों को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
पूजा आरंभ लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा का समय: शाम 06:15 बजे से रात 08:10 बजे तक। पूजा का कुल अवधि: लगभग 1 घंटा 55 मिनट। प्रदोष काल: शाम 05:45 बजे से रात 08:25 बजे तक। पूजा का शुभ मुहूर्त देखकर दीप जलाएं और मंत्रोच्चार के साथ आरती करें।
भोग अर्पित करें लक्ष्मी जी को फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं।
दीप जलाएं घर के हर कोने में दीप जलाएं।
दीपावली के ज्योतिषीय उपाय दीपावली पर कुछ सरल ज्योतिषीय उपाय अपनाकर आप अपने जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।
दीपदान करें किसी मंदिर में 11 या 21 दीये जलाएं।
गाय को भोजन कराएं:दीपावली के दिन गाय को गुड़ और चारा खिलाएं। कुबेर पूजन करें:धन के देवता कुबेर की पूजा करें।तुलसी पूजन,तुलसी के पौधे के पास दीप जलाएं।
दीपावली के दौरान बरतें ये सावधानियां
सुरक्षा का ध्यान रखें,पटाखे जलाते समय बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल रखें।
पर्यावरण का ध्यान रखें कम धुएं और आवाज वाले पटाखों का उपयोग करें।सामाजिक समरसता बनाए रखें।जरूरतमंदों की मदद करें और उनके साथ त्योहार की खुशियां बांटें।
22 अक्टूबर बुधवार गोवर्धन पूजा गोवर्धन पर्वत की पूजा दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है।
द्वापर में अन्नकूट के दिन इंद्र की पूजा करके उनको छप्पन भोग अर्पित किए जाते थे लेकिन ब्रजवासियों ने श्रीकृष्ण के कहने पर उस प्रथा को बंद करके इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे और गोवर्धन रूप में भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने लगे। इस दिन घर और मंदिरों में विविध प्रकार की खाद्य सामग्रियों से भगवान को भोग लगाया जाता है। इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसके समीप विराजमान कृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल-बालों की रोली, चावल, फूल, जल, मौली, दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है।ग्रामीण क्षेत्र में अन्नकूट महोत्सव इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन नए अनाज की शुरुआत भगवान को भोग लगाकर की जाती है। इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराके धूप-चंदन तथा फूल माला पहनाकर उनका पूजन किया जाता है और गौमाता को मिठाई खिलाकर उसकी आरती उतारते हैं तथा प्रदक्षिणा भी करते हैं। अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी आयु तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है साथ ही दारिद्रय का नाश होकर मनुष्य जीवनपर्यंत सुखी और समृद्ध रहता है। ऐसा माना जाता है कि यदि इस दिन कोई मनुष्य दुखी रहता है तो वह वर्षभर दुखी ही रहेगा। इसलिए हर मनुष्य को इस दिन प्रसन्न रहकर भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय अन्नकूट उत्सव को भक्तिपूर्वक तथा आनंदपूर्वक मनाना चाहिए।
भाई दूज :23 अक्टूबर गुरुवार भाई दूज भाई-बहन का त्योहार गोवर्धन पूजा के अगले दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का त्योहार होता है। भाई दूज का त्योहार यमराज के कारण हुआ था, इसीलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को अपने घर बुलाकर उसे तिलक लगाकर उसकी आरती उतारकर उसे भोजन खिलाती है। भाई दूज को संस्कृत में भागिनी हस्ता भोजना कहते हैं। भाईदूज पर यम और यमुना की कथा सुनने का प्रचलन है। भाई दूज पर भाई को भोजन के बाद पान खिलाने का प्रचलन है। मान्यता है कि पान भेंट करने से बहनों का सौभाग्य अखण्ड रहता है। भाई दूज पर जो भाई-बहन यमुनाजी में स्नान करते हैं, उनको यमराजजी यमलोक की यातना नहीं देते हैं। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना का पूजन किया जाता है। भाई दूज एक ऐसा त्योहार है जो संपूर्ण भारत में मनाया जाता है।
इस दिन यम के मुंशी भगवान चित्रगुप्त की पूजा का भी प्रचलन है। उनकी पूजा के साथ-साथ लेखनी, दवात तथा पुस्तकों की भी पूजा की जाती है। वणिक वर्ग के लिए यह नवीन वर्ष का प्रारंभिक दिन कहलाता है। इस दिन नवीन बहियों पर ‘श्री’ लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है। कहते हैं कि इसी दिन से चित्रगुप्त लिखते हैं लोगों के जीवन का बहीखाता। यम के निमित्त धन तेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज पांचों दिन दीपक लगाना चाहिए। कहते हैं कि यमराज के निमित्त जहां दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती है।




