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उत्तर प्रदेश

डॉ अम्बेडकर न केवल संविधान निर्माता थे, बल्कि समाज में समानता, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की स्थापना के लिए निरंतर संघर्षरत रहे – डॉ विनोद बिंद

डॉ आंबेडकर शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और दलितों के सशक्तीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण साधन मानते थे

चंदौली । भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई।
भदोही सांसद डॉ विनोद बिंद ने बाबा साहब के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्षमय जीवन और संविधान निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें समर्पण, संघर्ष और शिक्षा की महत्ता का संदेश देता है। वे न केवल संविधान निर्माता थे, बल्कि समाज में समानता, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की स्थापना के लिए निरंतर संघर्षरत रहे ।
उन्होंने कहा कि आज भी हमारे समाज में जाति, गरीबी और असमानता जैसी समस्याएं हैं। डॉ अंबेडकर का सपना था एक ऐसा भारत, जहां हर व्यक्ति को सम्मान, अवसर और न्याय बराबरी से मिले। उन्होंने माना कि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ वोट देना नहीं, बल्कि हर इंसान को समान अधिकार देना है – चाहे वह अमीर हो या गरीब, महिला हो या पुरुष, सवर्ण हो या दलित ।


सांसद डॉ विनोद बिंद ने कहा कि डॉ अंबेडकर को भारत का संविधान निर्माता कहा जाता है। उन्होंने देश के लिए ऐसा संविधान तैयार किया, जिसमें सभी को समान अधिकार, न्याय और स्वतंत्रता मिले – चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या वर्ग से हो। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, दलितों की शिक्षा, और सामाजिक समानता के लिए कई काम किए।

डॉ अम्बेडर ने कहा था – ‘शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा, वह दहाड़ेगा।’ यह उनके विचारों की ताकत को दिखाता । डॉ बिंद ने कहा कि अम्बेडकर ने अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद अपनी अलग पहचान बनाई और अपनी असाधारण उपलब्धियों के माध्यम से पूरे विश्व में सम्मान अर्जित किया। वह शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और दलितों के सशक्तीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण साधन मानते थे। आंबेडकर की प्रेरणा के कारण ही देश आज सामाजिक न्याय के सपने को साकार करने के लिए समर्पित है।

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