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वाराणसी

वाराणसी : पद्म भूषण पंडित राजन मिश्र की 75वीं जयंती पर रास ट्रस्ट द्वारा विशेष सांस्कृतिक आयोजन

फिल्म, साहित्य और भारतीय शास्त्रीय संगीत के माध्यम से महान संगीत साधक को भावपूर्ण श्रद्धांजलि’


हिंदुस्तान संदेश
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी । भारतीय शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत के संरक्षण, संवर्धन तथा युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पंडित साजन मिश्र  के मार्गदर्शन में स्थापित संस्था ’RAS’ द्वारा महान शास्त्रीय गायक एवं पद्म भूषण से सम्मानित’पंडित राजन मिश्र की 75वीं जयंती’ के अवसर पर वाराणसी में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । यह कार्यक्रम ’सनबीम स्कूल, वरुणा’ में आयोजित हुआ। सनबीम स्कूल के सहयोग से संपन्न इस आयोजन को ’बनारस लिट फेस्टिवल द्वारा प्रस्तुत एवं RAS ट्रस्ट द्वारा क्यूरेट’ किया गया। कार्यक्रम को ’एक ज्वेल्स, शाही क़िला तथा इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन  का प्रायोजन प्राप्त हुआ और इसका आयोजन ’इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रदर ऑफ बनारस नामक फिल्म के ट्रेलर प्रदर्शन के साथ हुआ। यह फिल्म स्व0 पंडित राजन मिश्र जी और पंडित साजन मिश्र जी की ऐतिहासिक संगीत-साझेदारी, उनकी साधना और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। फिल्म के माध्यम से दोनों महान कलाकारों की संगीत यात्रा और उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।

युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए RAS ट्रस्ट ने कार्यक्रम में युवा कलाकारों ’निषाद व्यास और गरूड़ मिश्र’ की शास्त्रीय गायन की युगल प्रस्तुति आयोजित की। उनके साथ ’हारमोनियम पर पंडित धर्म नाथ, सारंगी पर  विनायक सहाय तथा तबले पर  आनंद मिश्र’ ने संगत की। इस प्रस्तुति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने और युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित किया।
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण पंडित राजन मिश्र जी के जीवन और उनकी अद्वितीय संगीत विरासत को समर्पित पुस्तक Between Sound and Silence* का विमोचन रहा। इस अवसर पर प्रख्यात गायक ’हरिहरन ,  रूप कुमार राठौर,  दीपक मधोक, पंडित साजन मिश्र तथा श्रीमती सुनाली राठौड़’ उपस्थित रहे। पुस्तक के विमोचन के माध्यम से महान संगीत साधक के जीवन, उनकी संगीत यात्रा और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके अमूल्य योगदान को स्मरण किया गया।

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