आजमगढ़ : सनातन संस्कृति और आपसी भाईचारे का अनूठा प्रतीक, ऐतिहासिक मेले में उमड़ा जनसैलाब

गोविंद लाल शर्मा /आजमगढ़। सनातन संस्कृति की रक्षा और परंपराओं को सहेजने के उद्देश्य से आयोजित होने वाला जाफरपुर ग्राम सभा का प्राचीन मेला अपनी ऐतिहासिक भव्यता और साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए इस बार भी चर्चा के केंद्र में रहा। हर साल विजयादशमी के ठीक बाद शरद पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर लगने वाले इस मेले में आस्था, उल्लास और सामाजिक एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। मेले की शुरुआत परंपरा के अनुसार माता रानी के आगमन के साथ होती है, जो मेले से ठीक एक दिन पहले होता है। इसके अगले दिन विधि-विधान के साथ विसर्जन संपन्न किया जाता है। इस दौरान पूरे गांव और आसपास के इलाकों में उत्सव जैसा माहौल रहता है। मेला आयोजक अभिषेक सिंह ने बताया कि यह मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदू-मुसलमान सहित सभी जातियों और धर्मों के लोगों के बीच आपसी एकजुटता, भाईचारे और साम्प्रदायिक सौहार्द का एक मजबूत प्रतीक है। इसमें क्षेत्र के चाहे महिलाएं हों, बच्चे, बुजुर्ग या नौजवान पूरी शांति, अनुशासन और उत्साह के साथ भाग लेते हैं। मेले में पारंपरिक झूलों और लजीज व्यंजनों की दुकानों ने रौनक में चार चांद लगा दिए। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने चाट-फुल्की, चाउमीन, मोमोज और खास तौर पर प्रसिद्ध चौटहीया जलेबी का जमकर आनंद लिया। इस पारंपरिक आयोजन से न केवल आपसी प्रेम और कनेक्टिविटी मजबूत होती है, बल्कि स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों के आय के स्रोतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इस ऐतिहासिक मेले को सफल बनाने में हमारे पूर्वजों के समय से ही पूरा गांव और सभी युवा पीढ़ियां पूरी ऊर्जा, उत्साह और उमंग के साथ सहयोग करती चली आ रही हैं। गांव के सभी लोगों के आपसी समन्वय से ही यह मेला हर साल इतने सुचारू और भव्य रूप से संपन्न होता है। इस आयोजन को सकुशल और ऐतिहासिक रूप से संपन्न कराने में पुरोहित बृजेश कुमार दुबे, संदीप पाण्डेय, शिवांग सिंह, तेज प्रताप सिंह, जगदीश सिंह, रमाशंकर सिंह, आदर्श सिंह, आदर्श दुबे, अजय वर्मा, प्रमोद वर्मा, शुभम् वर्मा, प्रिंशु वर्मा, आदित्य वर्मा एवं समस्त ग्रामवासी रहे।




