बुलंदशहर में बनेगा 74 किमी ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे

संवाददाता,बुलंदशहर । जब किसी क्षेत्र में बड़ी सड़क बनती है तो उसका फायदा सिर्फ सफर आसान होने तक सीमित नहीं रहता है। सड़क अच्छी हो तो माल की ढुलाई आसान होती है,कारोबार को नया बाजार मिलता है।उद्योग लगाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।बुलंदशहर में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे को भी इसी नजर से देखा जा रहा है।प्रशासन अब यह पता लगाएगा कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से जिले में औद्योगिक नगरी बसाने,नए उद्योग लाने,युवाओं को रोजगार दिलाने और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने की कितनी संभावनाएं हैं। इसके लिए सोशल इंपैक्ट असेसमेंट (एसआईए) सर्वे कराया जाएगा। प्रशासन ने सर्वे के लिए टेंडर जारी कर दिया है। चयनित संस्था को दो महीने में रिपोर्ट देनी होगी।हालांकि,उद्योग लगने और रोजगार बढ़ने की संभावनाएं अभी अध्ययन का हिस्सा हैं। इनकी वास्तविक तस्वीर सर्वे और आगे होने वाले फैसलों के बाद ही साफ होगी। बुलन्दशहर जिले में लगभग 74 किलोमीटर लंबा ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की योजना है।इसके जरिए स्याना तहसील क्षेत्र से गुजर रहे गंगा एक्सप्रेसवे को नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने का प्रस्ताव है।इस परियोजना का मकसद सड़क संपर्क को बेहतर बनाना है,लेकिन इसके साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास की संभावनाएं भी जुड़ी हैं।इस एक्सप्रेसवे के बनने से दूसरे प्रमुख मार्गों तक पहुंच आसान होती है तो लोगों के आने-जाने के साथ सामान की ढुलाई में भी सुविधा मिलेगी।कारोबारियों को अपना सामान बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक नगरी विकसित करने की संभावनाएं सर्वे के अहम पहलुओं में शामिल होंगी,इसमें यह देखा जाएगा कि क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए जमीन,बिजली, पानी,परिवहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता कैसी है।साथ ही बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों को मिलने वाले संभावित फायदे भी समझे जाएंगे। किसी भी उद्योग के लिए कच्चा माल मंगाना और तैयार सामान को बाजार तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है।अगर सड़क संपर्क अच्छा हो तो इन कामों में सहूलियत मिल सकती है,इससे उद्योग लगाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।एसआईए सर्वे के जरिए इन्हीं परिस्थितियों का आकलन किया जाएगा, ताकि क्षेत्र में औद्योगिक विकास की संभावनाओं को बेहतर तरीके से समझा जा सके। बुलंदशहर के लोगों के लिए इस परियोजना से जुड़ा सबसे अहम सवाल यही है कि इससे रोजगार और कारोबार के कितने अवसर बन सकते हैं।अगर भविष्य में क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित होते हैं तो उत्पादन,सामान की ढुलाई,गोदाम,मरम्मत और दूसरी सेवाओं से जुड़े काम बढ़ सकते हैं,इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना रहेगी,इसका फायदा छोटे कारोबारियों को भी मिल सकता है। उद्योगों और उनसे जुड़ी गतिविधियों के बढ़ने पर परिवहन, खानपान,दुकानों और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर कारोबार को गति मिलने की संभावना हो सकती है। ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए जिले के लगभग 8700 किसानों की 677.80 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है।ऐसे में परियोजना से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों की स्थिति को समझना भी जरूरी है। एसआईए सर्वे में यह पता लगाया जाएगा कि जमीन अधिग्रहण से लोगों की आजीविका,आमदनी,खेती और रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ सकता है।कई परिवारों की आजीविका खेती पर निर्भर होती है,ऐसे में जमीन जाने से उनकी आमदनी और जीवनशैली प्रभावित हो सकती है।सर्वे के दौरान प्रभावित लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।साथ ही परियोजना के कारण उनके सामने आने वाली संभावित परेशानियों और क्षेत्र में होने वाले बदलावों को भी समझने का प्रयास किया जाएगा। सर्वे में सामाजिक विज्ञान,मनोविज्ञान और अन्य संबंधित विषयों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।ये विशेषज्ञ स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाकर परियोजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करेंगे,इसमें प्रभावित परिवारों की स्थिति, स्थानीय व्यापार,रोजगार की संभावनाओं और औद्योगिक विकास से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाएगा। एसआईए सर्वे कराने के लिए जिला प्रशासन ने टेंडर जारी कर दिया है।चयनित संस्था को दो महीने में सर्वे पूरा कर रिपोर्ट देनी होगी।इसके बाद जिला प्रशासन रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजेगा।



