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गाजीपुर

गाजीपुर : बसुका गांव में 40 साल पुराने खड़ंजों पर चल रहा विकास का दावा

बजबजाती नालियां और गंदगी व्यवस्था की खोल रही पोल

सेवराई / गाजीपुर । विकास के तमाम दावों के बीच गाजीपुर जिले के सेवराई तहसील क्षेत्र का ग्राम बसुका आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसता नजर आ रहा है। गांव की पश्चिम पट्टी में बजबजाती नालियां, जगह-जगह फैली गंदगी और वर्षों पुराने खड़ंजे ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई व्यवस्था कागजों में भले ही दुरुस्त दिखाई देती हो, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में नियमित रूप से नालियों की सफाई नहीं हो रही है और न ही कीटनाशक/मच्छररोधी दवाओं का पर्याप्त छिड़काव कराया जा रहा है। इससे जलभराव, दुर्गंध और मच्छरों की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जिलाधिकारी स्तर से स्वच्छता और संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं, तो गांव में उन निर्देशों का पालन आखिर कौन सुनिश्चित करेगा?

40 साल पुराने खड़ंजे, विकास की राह अभी भी अधूरी

बसुका की पश्चिम पट्टी में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी समस्या जर्जर और पुराने खड़ंजे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन रास्तों पर आज की तारीख में पक्की RCC सड़क होनी चाहिए, वहां दशकों पुराने खड़ंजे ही विकास की तस्वीर बने हुए हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है तथा रास्तों पर कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने और बेहतर सड़कें उपलब्ध कराने की बात लगातार कही जा रही है, तो बसुका की पश्चिम पट्टी विकास की दौड़ में पीछे क्यों छूट गई ? सफाई कर्मचारी आते हैं या सिर्फ कागजों पर होती है सफाई ? सबसे बड़ा सवाल सफाई व्यवस्था को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से सफाई करने नहीं पहुंचते, जिसके कारण नालियां गंदगी से पटती जा रही हैं। कई स्थानों पर नालियों का पानी जमा है और कूड़ा-कचरा लंबे समय से पड़ा दिखाई देता है। ऐसे में सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी है। यदि शासन-प्रशासन स्वच्छता को प्राथमिकता दे रहा है तो फिर गांव की गलियों और नालियों तक उसका असर क्यों नहीं दिखाई दे रहा ? ग्रामीण पूछ रहे सवाल—आखिर विकास कहां हो रहा है? बसुका के ग्रामीण अब सीधे सवाल पूछ रहे हैं—जब योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है, तो गांव की पश्चिम पट्टी तक विकास क्यों नहीं पहुंच रहा? क्या ग्रामीणों को आज भी 40 साल पुराने खड़ंजों, गंदगी और बजबजाती नालियों के बीच ही जीवन गुजारना पड़ेगा? ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव की तत्काल सफाई कराकर नालियों की सफाई, कीटनाशक का छिड़काव और जर्जर खड़ंजों की जगह RCC सड़क निर्माण कराया जाए। साथ ही सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी करते हुए लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। अब देखना यह है कि बसुका की पश्चिम पट्टी तक विकास की किरण कब पहुंचती है, या फिर सरकारी फाइलों में विकास की रफ्तार तेज बनी रहेगी और जमीन पर ग्रामीण 40 साल पुराने हालात में ही जीने को मजबूर रहेंगे। – विवेकानंद राय गाज़ीपुर

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