नई दिल्ली : सुरक्षित वैश्विक व्यापार के लिए नियम-आधारित व्यवस्था जरूरी- भारत

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (यूएनसीआईटी आरएएल) की 60वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन का आयोजन भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय और यूएनसीआईटीआरएएल के साथ संयुक्त रूप से मिलकर किया। कार्यक्रम के समापन सत्र को विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने मुख्य रूप से संबोधित किया। सचिव दलेला ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के क्रमिक विकास और आधुनिकीकरण में भारत के दीर्घकालिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने वैश्विक व्यापार और वाणिज्य व्यवस्था को संचालित करने वाले कानूनी ढांचे को अधिक सुदृढ़, नियमों पर आधारित और न्यायसंगत बनाने के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया। दलेला ने कहा कि यूएनसीआईटीआरएएल के साथ भारत का दशकों पुराना सहयोग इस बात का प्रमाण है कि भारत हमेशा से एक पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुकूल कानूनी वातावरण तैयार करने का पक्षधर रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 26 जुलाई की देर शाम सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा यूएनसीआईटीआरएएल की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर, विदेश मंत्रालय ने भारत के सुप्रीम कोर्ट और यूनाइटेड नेशंस कमीशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड लॉ के साथ मिलकर एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में सेक्रेटरी (इकोनॉमिक रिलेशंस) सुधाकर दलेला शामिल हुए। यह मौका इंटरनेशनल ट्रेड लॉ के विकास में यूएनसीआईटीआरएएल के साथ भारत के योगदान और सहयोग पर विचार करने के लिए बहुत उपयुक्त रहा।तीन दिनों तक चले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दुनिया भर से आए प्रख्यात न्यायविदों, कानूनी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस मंच पर भू-राजनीतिक अस्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधान और तेजी से होते डिजिटल बदलावों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों में एकरूपता और स्थिरता लाने पर गंभीर मंथन किया गया। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में डिजिटल अर्थव्यवस्था, सीमा-पार दिवाला प्रक्रिया (इन्सॉल्वेंसी), अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) और मध्यस्थता तंत्र में सुधार जैसे ज्वलंत विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। इससे पहले सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए एक नियम-आधारित कानूनी संरचना की आवश्यकता पर बल दिया था, जिसे समापन सत्र में सचिव दलेला के वक्तव्य से और मजबूती मिली। इस सफल आयोजन ने न केवल अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित किया है, बल्कि विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) की विकासात्मक प्राथमिकताओं के अनुसार भविष्य के व्यापार कानूनों को अधिक समावेशी बनाने का संदेश भी दिया है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)




