मस्जिदों को इबादत के साथ शिक्षा, समाजसेवा का केंद्र बनाया जाए
जमीयत उलमा शहर कानपुर की ओर से कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण, समाज सुधार और पारिवारिक समस्याओं के समाधान पर बल दिया
आसिफ हुसैनः कानपुर। जमीयत उलमा शहर कानपुर की ओर से जाजमऊ स्थित जामिया महमूदिया अशरफ उलूम में संगठन को मजबूत करने, समाजसेवा व शिक्षा के कार्यों को व्यवस्थित करने तथा कार्यकर्ताओं के वैचारिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें कहा गया कि मस्जिदों को केवल इबादत का स्थान न मानकर शिक्षा, समाजसेवा और दावत का केंद्र बनाया जाए।
मुख्य अतिथि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी ने कार्यकर्ताओं को ईमानदारी, समर्पण तथा सुन्नत-ए-नबव के अनुसार जीवन बिताने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि योजनाओं को केवल बैठकों और कागज़ों तक सीमित न रखें, बल्कि अभी से ज़मीनी स्तर पर काम शुरू करें। प्रत्येक स्थानीय इकाई अपने क्षेत्र में कम से कम तीन विभागों—जैसे संगठित मकतब, जिम और सद्भावना मंच—पर कार्य प्रारंभ करें, ताकि क्षेत्र को आदर्श बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि हर मस्जिद को “आदर्श मस्जिद” बनाया जाए, जहां नियमित मकतब चले और प्रतिदिन दस मिनट का कुरआन व हदीस का पाठ हो। जिन लोगों या जिनके घरों और इबादतगाहों को निशाना बनाया जा रहा है, उनकी हर संभव सहायता की जाए तथा उन्हें कानूनी और सामाजिक सहयोग दिया जाए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को अपनी सेहत का भी विशेष ध्यान रखने की सलाह दी और कहा कि अक्टूबर से पहले होने वाली अगली बैठक में आज तय किए गए सभी लक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी।प्रदेश महासचिव मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने समाज सुधार और पारिवारिक समस्याओं के समाधान पर विशेष बल दिया। उन्होंने सभी विधानसभा और वार्ड इकाइयों से अगले तीन महीनों की कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा, ताकि स्थानीय स्तर पर कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा सके।जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के नाज़िम-ए-तंजीम मुफ़्ती ज़फ़र अहमद क़ासमी ने “आदर्श शहर” की रूपरेखा और “सद्भावना मंच” के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच फैली गलतफहमियों को दूर करने तथा मीसाक-ए-मदीना की भावना के अनुसार आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
जमीयत उलमा उत्तरी भारत के संयोजक मुफ़्ती ज़ाकिर हुसैन क़ासमी ने युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करने के लिए “रफ़ीक़” विभाग का विस्तृत परिचय कराया।जमीयत उलेमा मध्य ज़ोन उत्तर प्रदेश के नाज़िम-ए-तंजीम मुफ़्ती हिलाल अहमद क़ासमी ने नई पीढ़ी के दीन और ईमान की सुरक्षा के लिए संगठित मकतबों की स्थापना पर ज़ोर दिया। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में धार्मिक शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत शिक्षा को बढ़ावा देने की योजना प्रस्तुत की।
समाज सुधार समिति, जमीयत उलेमा मध्य ज़ोन उत्तर प्रदेश के संयोजक मुफ़्ती मोहम्मद सलमान क़ासमी ने “आदर्श मस्जिद” विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि मस्जिदों को केवल इबादत का स्थान न मानकर शिक्षा, समाजसेवा और दावत का केंद्र बनाया जाए। उन्होंने सोशल मीडिया का सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग कर झूठे प्रचार का जवाब देने पर भी विस्तार से मार्गदर्शन दिया।मुफ़्ती मोहम्मद अख़लाक़ ख़ाँ क़ासमी तथा मौलाना अबू फ़ुज़ैल क़ासमी ने जमीयत स्टडी सेंटर और मॉडल विलेज (जन विकास सेवा) जैसे महत्वपूर्ण विभागों का परिचय कराया।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में विभिन्न विधानसभा और वार्ड इकाइयों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बच्चों, महिलाओं और बड़ों के लिए अनेक नए संगठित मकतब खोलने का संकल्प लिया। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की कम से कम पाँच मस्जिदों में प्रतिदिन कुरआन, हदीस और मकतब की व्यवस्था शुरू कर उन्हें आदर्श मस्जिद बनाने, अल्पसंख्यकों के कानूनी संरक्षण (JEM) तथा सद्भावना मंच के लिए प्रत्येक विधानसभा और वार्ड स्तर पर समितियाँ गठित करने, हर क्षेत्र से 25 से 50 सक्रिय और योग्य युवाओं को संगठन से जोड़ने, घर-घर सर्वेक्षण करने, 50 से 100 नए सहयोगी सदस्य बनाने, मदरसों को जमीयत स्टडी सेंटर से जोड़ने, निकाह काउंसलिंग तथा इमाम प्रशिक्षण (तदरीबुल अइम्मा) के कार्यक्रम आयोजित करने तथा अगले एक महीने के भीतर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इसी प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएँ आयोजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी मुजीबुल्लाह इरफ़ानी की कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई। मौलाना मोहम्मद ज़कवान क़ासमी तथा मौलवी मोहम्मद मसऊद जामी ने नात एवं मनक़बत प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन मौलाना अंसार अहमद जामी ने किया।मौलाना नूरुद्दीन अहमद क़ासमी, मौलाना मसऊद अहमद जामी, शारिक नवाब, मोहम्मद शाहिद, क़ारी मोहम्मद जुनैद राइनी, मौलाना आफ़ताब आलम क़ासमी, मौलाना शरफ़ आलम साक़बी, हाफ़िज़ मोहम्मद रिज़वान मक्की तथा मौलाना मोहम्मद सज्जाद क़ासमी ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन देश और समाज की शांति, सुरक्षा और उन्नति की दुआ के साथ हुआ।




