ट्रंप की सनक से फिर हुए ईरान पर हवाई हमले, तेल की कीमतें बढ़ीं
एमओयू पर दस्तखत के बाद भी अमेरिकी सदर अपनी हरकतों से नहीं आ रहे बाज, हमले के जवाब में ईरान ने कुवैत, कतर, बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डों को बनाया निशाना, ट्रंप बोले, सीजफायर खत्म हो गया, ईरान डील के लिए कर रहा फोन, अमेरिकी हमलों के बाद से फिर बढ़ने लगीं तेल की कीमतें
आसिफ हुसैनः कानपुर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक व्यापारी से नेता बने हैं। वह पूरी दुनिया को व्यापार के नजरिये से चलाना चाहते हैं। इसीलिए अमेरिका की विश्वसीयता बहुत की कम देशों में बची है। 28 फरवरी को अचानक इस्राइल और अमेरिका ने इस्राइल पर हमला किया। एक

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महीने से अधिक समय तक वार चलने के बाद सीजफायर की घोषणा की गई। पाकिस्तान के बाद पेरिस में शांति वार्ता और दोनों पक्षों ने एमओयू पर दस्तखत किए लेकिन हमेशा पूरी दुनिया को सदर ट्रंप पर भरोसा नहीं था। क्योंकि उन्होंने अपने पहले और दूसरे कार्यकाल में अभी तक भरोसे लायक कोई काम नहीं किया है। नतीजा भी यही रहा। ईरान में शहीद सुप्रीम लीडर को सुपुर्देखाक करने से पहले ही अमेरिका ने स्टेट ऑफ होर्मुज और ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले कर दिए। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन, कतर और जार्डन में अमेरिकी फौजी अड्डों पर मिसाइलें और ड्रोन से हमला कर तहस नहस कर दिया। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के एक एफ 16 को भी जमीदोज कर दिया।
अमेरिका में ही ट्रंप की रेटिंग बहुत ही गिर गई है। जनता अब उनको भरोसे लायक नहीं समझ रही है। वह झूठ बोलने में माहिर हैं। जब पत्रकार उनके झूठ का पर्दाफाश कर देते हैं तो वह उनसे उलझ जाते हैं। ईरान से बेवजह जंग में उनके साथ नाटो के देश नहीं आए तो उन पर भड़क गए। स्पेन से अपने सारे रिश्ते खत्म कर लिए। सदर ट्रंप को यह समझ में नहीं आ रहा है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल गई है। अब पूरी दुनिया को अमेरिका के इशारे पर नहीं चलाया जा सकता है। क्योंकि चीन और रूस भी बहुत आगे हैं। अमेरिका ने दशकों से ईरान पर पाबंदी लगा रखी है लेकिन युद्ध में ईरान ने इस्राइल और अमेरिका को धराशायी कर दिया है। इसकी झुंझलाहट डोनाल्ड ट्रंप पर कायम है। ईरान ने समझौते दौरान ही साफ कर दिया था कि किसी भी देश का जहाज होर्मुज से उनकी बिना अनुमति के नहीं निकल पाएगा। यह बात अमेरिका को अखर रही है। वह अपनी नाजायज औलाद इस्राइल को हथियार नहीं भेज पा रहा है।
इसीलिए हताशा में तुर्किए में नाटों सदस्यों की बैठक के दौरान ही उन्होंने सीजफायर तोड़ने और ईरान पर हमले का आदेश दे दिया। ईरान भी अमेरिका की धोखेबाजी को बखूबी जान गया है। इसलिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान और ईरान के विदेश मंत्री कहते हैं कि ईरान हर हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। गुरूवार की रात को अमेरिकी सेना ने ईरान के 90 से अधिक ठिकानों पर हमला कर किया था। यहां पर ट्रेन की पटरियों को भी निशाना बनाया गया। पुलों, चाहबार पोर्ट का केंट्रोल टॉवर, बंदर अब्बास, सिरिक, बुशहर आदि को निशाना बनाया गया। इन हमलों में 14 लोग शहीद हुए औऱ 78 लोग घायल हुए। यह सब युद्ध का उल्लंघन है लेकिन इस्राइल औऱ अमेरिका के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून कोई मायने नहीं रखते हैं।
अमेरिका के हमले के जवाब में ईरान ने भी कतर, कुवैत, बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए। उधर, फिर से कई देशों ने जंग बंदी के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। क्योंकि हमले के बाद से तेल की कीमतें फिर बढ़ने लगी हैं। इसका असर सारी दुनिया के देशों पर पड़ रहा है।
उधर, ट्रंप ने कहा है कि सीजफायर खत्म हो गया है, लेकिन ईरान ने डील के लिए फोन किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जहाजों पर हमला हुआ तो जवाब सख्त होगा। होर्मुज से निकलने वाले जाहजों की संख्या कम हो गई है। हालात नाजुक बने हैं। ईरान ने भी अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। वैसे यह युद्ध किसी के लिए भी सही नहीं है। उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी सदर को भी यह बात समझ में आएगी कि ईरान वेनेजुएला नहीं है। इस युद्ध के जरिये अमेरिका खाड़ी में अपनी स्थिति और कमजोर कर रहा है। क्योंकि अमेरिका के सभी सहयोगी देशों की जनता ईरान के साथ है। इसलिए वहां की हुकूमतों पर भी दबाव है कि युद्ध खत्म हो। ताकि कहीं इसकी चिंगारी उनके देशों तक न पहुंच जाए।



