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राजनीतिराज्य

रांची में आदिवासियों की जमीन पर नहीं बनेगा सांसद-विधायकों का घर

हेमंत सरकार करेगी वापस

रांची। राजधानी रांची में भूमिहीनों को उजाड़ कर विधायकों-सांसदों के लिए आवास नहीं बनेगा।यह फैसला हेमंत सोरेन सरकार ने रांची उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर लिया है।वित्त सह संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस बाबत राज्य,निबंधन और भूमि सुधार विभाग को पत्र लिख कर निर्देश दे दिया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने निर्देश दिया है कि दो महीने के अंदर रांची शहर के आसपास विधायक-सांसद स्वावलंबी समिति के लिए सुयोग्य भूमि हस्तांतरित करायी जाए। कांके अंचल के मौजा चुटू के थाना संख्या-164, खाता संख्या-118, प्लॉट-115 में 35 एकड़ जमीन जो पूर्व में आदिवासियों के नाम से बंदोबस्त की गई थी,उनके बंदोबस्त जमीन को पुनर्बहाल किया जाए। साथ ही जिस पदाधिकारी के द्वारा भूमिहीनों के नाम से बंदोबस्त भूमि की बंदोबस्ती कैसे रद्द कर दी गई, उसको चिह्नित कर उसके विरुद्ध नियमानुकूल कार्रवाई किया जाए।

झारखंड विधायक और सांसद गृह निर्माण स्वावलंबी सहकारी समिति को रांची जिला के कांके अंचल के मौजा चुटू की थाना संख्या-164, खाता संख्या-118, प्लॉट-115 में 35 एकड़ गैरमजरूआ मालिक परती कदिम भूमि आवंटित-हस्तांतरित की गई थी।गृह निर्माण समिति की ओर से 14 अप्रैल 2018 को 35 एकड़ जमीन के लिए 1,70,62,500 रुपये जमा भी करा दिए गए थे। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हस्तांतरण के बाद उस जमीन का निबंधन नहीं किए जाने का मामला विधायकों ने उठाया।इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री को सरकार का उत्तर देने का निर्देश दिया था। इसके बाद रांची के उपायुक्त से जमीन की अद्यतन स्थिति की जानकारी मांगी गई। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया कि रांची डीसी की रिपोर्ट पर राज्य सरकार ने गंभीरता से विचार करने के बाद यह निर्णय लिया है कि भूमिहीनों को उजाड़ कर विधायकों-सांसदों के लिए गृह निर्माण कराया जाना मानवीय व नैतिक दृष्टिकोण से उचित नहीं होगा।

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