
डॉ एके राय
गाजीपुर। महामना पं. मदन मोहन मालवीय की 164 वी जयंती नगर के चंदननगर ,रौजा के मैरेज हाल में सेवानिवृत्त जिला जज कमल नयन पांडेय एवं सत्येंद्र नाथ द्विवेदी के संयोजकत्व में मनाई गई।अपने सम्बोधन में वक्ताओं ने महामना के कृतित्व और व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए उनकी उपलब्धियां एवं विचारों पर प्रकाश डाला। शिक्षा की महत्ता को देखते हुए महामना ने जन सहयोग से घूम घूम कर काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर एक कीर्तिमान स्थापित कर दिया। महामना के दौहित्र प्रदीप चतुर्वेदी ने उनकी वकालत के विषय में याद दिलाते हुए बताया कि काकोरी कांड में 172 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गयी थी। इससे महामना जी काफी व्यथित हुए और वह पुनः वकालत के क्षेत्र में वापस लौटे और इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए उन्होंने 151 आरोपियों को फांसी की सजा से बरी करा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीनानाथ चतुर्वेदी पूर्व जिला अभियोजन अधिकारी ने भी मालवीय जी के शैक्षिक एवं सामाजिक जीवन पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने काशी नरेश को भी सादर नमन किया जिन्होंने विश्वविद्यालय हेतु जमीन दान में दी थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता अजीत सिंह पूर्व वाणिज्य अधीक्षक रेलवे एवं संचालन दुर्गा दत्त चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर दयाशंकर उपाध्याय, लक्ष्मण उपाध्याय, अरविंद मिश्रा, दयाशंकर तिवारी, अनिल उपाध्याय, राजेंद्र द्विवेदी, दीनानाथ तिवारी देवदत्त उपाध्याय टीपी सिंह संतोष उपाध्याय आदि उपस्थित रहे। उसी कड़ी में पी. जी. कॉलेज मलिकपूरा में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मशताब्दी के अवसर पर “राष्ट्रनिर्माण में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान” विषयक विचार गोष्ठी सम्पन्न हुई।
महर्षि विश्वामित्र कल्चर क्लब के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दिवाकर सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बाजपेयी जी को भारतीय राजनीति में वैचारिक दृढ़ता, लोकतांत्रिक मर्यादा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले राजनेता की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. दिनेश सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक, कूटनीतिक एवं सांस्कृतिक योगदान की विवेचना करते हुए कहा कि अटल जी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सशक्त और विश्वसनीय छवि निर्मित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। वहीं डॉ. शिव प्रताप सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अटल जी की राजनीति सत्ता-केन्द्रित न होकर राष्ट्र और समाज के व्यापक हितों से जुड़ी रही।
डॉ. प्रिंस कुमार कसौधन ने कहा कि वे आधुनिक भारत के उन राजनेताओं में थे, जिन्होंने विकास और लोकतंत्र के बीच संतुलन स्थापित किया। उनका दृष्टिकोण केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों की गहरी समझ निहित थी। इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं का पाठ डॉ. सर्वेश पाण्डेय द्वारा किया गया। कविताओं के माध्यम से अटल जी के मानवीय संवेदना और राष्ट्रप्रेम को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। आयोजन में महाविद्यालय के शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ एवं कर्मचारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




