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उत्तर प्रदेशवाराणसी

वाराणसी:छत्रपति शिवाजी के राजनीतिक आदर्श विषय पर आयोजित हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

— शिवाजी का काशी से रहा है गहरा नाता

— काशी के पंडित गागाभट्ट ने शिवाजी के राज्याभिषेक को मान्यता दी

सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
विशाल भारत संस्थान एवं सामाजिक विज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में लमही के सुभाष भवन में छत्रपति शिवाजी महाराज के राजनैतिक आदर्श विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्यवक्ता महाराष्ट्र के जालना के आर्ट्स साइंस कॉलेज के प्रिंसिपल एवं इतिहासकार प्रोफ़ेसर जाकिर पठान, जलगांव के इतिहासकार प्रोफ़ेसर पी०डी० जगताप एवं अध्यक्षता कर रहीं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय की संकायाध्यक्ष प्रोफेसर बिन्दा परांजपे ने सुभाष मन्दिर में माल्यार्पण किया एवं दीपोज्वलन कर संगोष्ठी की शुरुवात की। प्रथम सत्र में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस रिसर्च सेंटर की निदेशक आभा भारतवंशी ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए बताया कि शिवाजी ने हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना कर मुगलों को चुनौती दी। उनकी अधीनता स्वीकार नहीं किया। मराठों को धूल से उठाकर आसमान में पहुंचा दिया। शिवाजी सिर्फ मराठों के नहीं बल्कि पूरे भारत के महानायक बन गए।द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता प्रोफ़ेसर जाकिर पठान ने बताया कि महाराष्ट्र की भूमि शूरवीरों को पैदा करती है। शिवाजी महाराज लोगों के दिलों में बस्ते हैं। विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर पी०डी० जगताप ने कहा कि शिवाजी महाराज सिर्फ मराठों के, सिर्फ महाराष्ट्र के, सिर्फ हिन्दुओं के, सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ के देश भक्ति के प्रेरणा के श्रोत हैं।

शिवाजी महाराज सिर्फ महाराष्ट्र के ही नहीं बल्कि भारत के कोने-कोने रह रहे लोगों के प्रतीक हैं। महाराष्ट्र में घर-घर में शिवाजी का नाम नगरों एवं शिक्षण संस्थानों के नाम रखे जाते हैं। शिवाजी भारत के रोम-रोम में भासे हैं।अध्यक्षता कर रहीं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय की संकायाध्यक्ष प्रोफेसर बिन्दा परांजपे ने कहा कि शिवाजी महाराज मुगल सत्ता के खिलाफ स्वदेशी आन्दोलन के मुख्य प्रेरणा श्रोत रहे हैं।आजादी के आन्दोलन के समय बाल गंगाधर तिलक, वीर सावरकर जैसे स्वतंत्रता  सेनानियों के प्रेरणा श्रोत शिवाजी महाराज रहे हैं। महराष्ट्र में शिवाजी की देवता के रूप में पूजा की जाती है। शिवाजी के विचार उनके कार्यों से भारत की आने वाली पीड़ियाँ बहुत कुछ सीख सकती हैं। लोगों के अंदर स्वराज्य एवं देशभक्ति की भावना के प्रेरणा श्रोत शिवाजी महाराज रहे हैं। स्वागत भाषण विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीगुरुजी ने दिया। संचालन डॉ० निरंजन श्रीवास्तव ने किया एवं धन्यवाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ० मृदुला जायसवाल ने दिया।

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