वाराणसी: तुर्की और पाकिस्तान का शव यात्रा निकला,मुर्दाबाद के लगे नारे

— जो दुकानदार तुर्की का कोई सामान बेचेगा, उसका आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार होगा
— पाकिस्तान और तुर्किये की यारी, पूरी दुनिया से गद्दारी
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
जब तुर्किये में भूकम्प आया था तब भारत ने उसके नागरिकों की जान बचाने के लिए राशन भेजा, दवा भेजी लेकिन उसके बदले तुर्किये ने भारत के नागरिकों की हत्या करने के लिए घातक ड्रोन भेजे। पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ खुलकर खड़ा हो गया।वर्ष 1192 में तुर्कों ने भारत पर हमला किया, भारत को गुलाम बनाया और वर्षों तक भारत के लोगों के साथ नस्लीय भेदभाव करते रहे। खुद सुल्तान बलबन ने कहा था कि जब मैं किसी तुच्छ मुसलमान को देखता हूँ तो मेरी नाड़ी क्रोध से उत्तेजित हो जाती है। पाकिस्तान के साथ जब जंग शुरू हुई, तो तुर्किये पाकिस्तान के साथ खड़ा हो गया। ऐसे में भारत के लोगों ने पाकिस्तान और तुर्किये का पूर्ण बहिष्कार करने का स्वतः फैसला लिया है। विशाल भारत संस्थान द्वारा लमही के नेताजी सुभाष मन्दिर से तुर्किये और पाकिस्तान की शव यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या जुटे मुस्लिमों ने पाकिस्तान और तुर्किये मुर्दाबाद के नारे लगाए।
शव लेकर चल रहे अफरोज पाण्डेय, अफसर बाबा, नौशाद दूबे, शहाबुद्दीन तिवारी, लियाकत अली ने कहा कि आतंकवादियों का साथ देने वाले देश की आत्मा मर चुकी है, इसलिए इनकी शव यात्रा निकाली जा रही है। इस अवसर पर विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि जिस तुर्की के लोगों के जीवन को बचाने के लिए भारत ने दवा और अनाज भेजा, वही तुर्की पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत को तबाह करना चाहता है। ऐसे तुर्की से किसी तरह का कोई रिश्ता नहीं रखना चाहते। पाकिस्तान और तुर्की दोनों आतंकियों के मददगार है। इनका पूर्ण बहिष्कार होना चाहिए। अब नागरिकों ने पूर्ण बहिष्कार का फैसला किया है।जौनपुर के जिला चेयरमैन नौशाद अहमद दूबे ने कहा कि तुर्की हमेशा से धोखेबाज हैं। इनकी फितरत है धोखा देना। पाकिस्तान और तुर्की से किसी तरह का कोई सम्बन्ध नहीं रखना है। डॉ० नजमा परवीन ने कहा कि पाकिस्तान का दाना पानी सब रुकेगा और तुर्की को भी जबाव दिया जाएगा।




