काशी ज्ञान का केंद्र, यहाँ की विविधता को समझना युवाओं की जिम्मेदारी- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

हिंदुस्तान संदेश, सुशील कुमार मिश्र / वाराणसी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में कर्नाटक संगीत के महान संगीतकार मुत्तुस्वामी दीक्षितर की 250वीं जयंती के अवसर पर 250 रुपये के स्मारक सिक्के का विमोचन किया। बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में आईआईटी बीएचयू के भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-आईकेएस) की ओर से आयोजित समारोह में वित्त मंत्री ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर वित्त मंत्री ने महान संगीतकार मुत्तुस्वामी दीक्षितर के जीवन, उनकी संगीत साधना और भारतीय शास्त्रीय संगीत को दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि मुत्तुस्वामी दीक्षितर ने अपनी संगीत रचनाओं के माध्यम से भारत के विभिन्न तीर्थस्थलों और मंदिरों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया था। काशी में देवी की स्तुति करते हुए वे काशी विश्वलक्ष्मी का वर्णन करते हैं। उनकी रचनाओं में संबंधित मंदिर के पवित्र वृक्ष (स्थलवृक्ष), आसपास की नदियों, पर्वतों और उस स्थान की भौगोलिक विशेषताओं का भी उल्लेख मिलता है। उनकी रचनाओं की एक और विशेषता यह थी कि वे शैव परंपरा, शाक्त उपासना और तांत्रिक साधना के विभिन्न तत्वों को भी अपनी कृतियों में समाहित करते थे। महान चित्रकारों की तरह मुत्तुस्वामी दीक्षितर अपनी रचनाओं में अपनी विशिष्ट पहचान छोड़ते थे। वे अपनी कृतियों में ‘गुरुगुह’ नाम की मुद्रा का प्रयोग करते थे और साथ ही राग के नाम को भी रचना में समाहित करते थे। कार्यक्रम की शुरुआत में शास्त्रीय संगीत की सुमधुर प्रस्तुतियाँ हुईं। वित्त मंत्री ने वीणा वादन और गायन की प्रशंसा करते हुए इसे ‘आत्मा को छू लेने वाला अनुभव’ करार दिया। उन्होंने कहा कि वीणा एक अत्यंत प्राचीन वाद्ययंत्र है, जो न केवल संगीत का माध्यम है बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का भी प्रतीक है। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने स्कूली छात्रों से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की इन समृद्ध विधाओं को समझने का प्रयास करें।उन्होंने बताया कि दीक्षितार ‘कर्नाटक संगीत त्रिमूर्ति’ का हिस्सा थे। उनकी रचनाएँ न केवल संगीत हैं। उनमें इतिहास, भूगोल, संस्कृति और तंत्र विद्या का अनूठा समावेश होता है।उन्होंने काशी को ज्ञान का केंद्र बताया और कहा कि यहाँ की विविधता को समझना युवाओं की जिम्मेदारी है।



