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International news राजनीतिक स्वार्थ साधने का साधन नहीं, जिम्मेदारी है वीटो- भारत

न्यूयॉर्क। भारत ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक बार फिर वैश्विक व्यवस्था में सुधार को लेकर बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की पूर्ण बैठक (प्लेनरी) में वीटो के इस्तेमाल पर बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (पी5) को उनकी सीमाओं और जिम्मेदारियों का अहसास कराया। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वीटो एक अत्यंत गंभीर जिम्मेदारी है, न कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ साधने का कोई साधन। राजदूत हरीश ने अपने संबोधन से जुड़ी एक वीडियो क्लिप ‘एक्स’ पर साझा की, जिसमें उन्होंने कहा सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों में से दो देशों ने पिछले साढ़े तीन दशकों से अधिक समय से एक बार भी वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है। इसके विपरीत, अंतरराष्ट्रीय शांति के निर्णयों को प्रभावित करने वाले अधिकांश वीटो या वीटो का उपयोग करने की धमकियां पी5 के अन्य तीन देशों की ओर से ही आती रही हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में आम सहमति के अलिखित नियम अक्सर एक ‘छिपे हुए वीटो’ के रूप में काम करते हैं, जो प्रतिबंध समितियों और महत्वपूर्ण निर्णयों को बाधित करते हैं। भारतीय राजदूत ने साफ किया कि वैश्विक सुरक्षा ढांचे में व्यापक बदलाव के बिना कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में ‘टुकड़ों में किए गए सुधार’ किसी काम नहीं आएंगे। इसके बजाय, सुधारों से जुड़े सभी पांचों प्रमुख पहलुओं, जिसमें सदस्यता की श्रेणियां, वीटो का प्रश्न, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, विस्तारित परिषद का आकार और कार्यप्रणाली शामिल हैं, पर एक साथ मिलकर व्यापक रूप से काम करने की सख्त जरूरत है।
यह वक्तव्य सुरक्षा परिषद में अपनी स्थायी और उचित भूमिका के लिए भारत के लंबे समय से जारी प्रयासों की पुष्टि करता है। भारत सुरक्षा परिषद में सुधार लाने के लिए वर्षों से वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। भारत का हमेशा से यह स्पष्ट और सैद्धांतिक स्टैंड रहा है कि एक संशोधित और विस्तारित सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों और ‘ग्लोबल साउथ’ को न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। भारत ने बिना वीटो अधिकार के नए सदस्यों को जोड़ने के विचार का हमेशा कड़ा विरोध किया है, क्योंकि इससे ‘दूसरे दर्जे’ की सदस्यता का निर्माण होगा, जो आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं से मेल नहीं खाती। अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था, विशाल आबादी और शांति अभियानों में ऐतिहासिक योगदान के दम पर भारत, जी4 समूह (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) तथा अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण और समान अधिकारों वाली स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए निरंतर और अथक प्रयास कर रहा है। रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी

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