ट्रंप और जिनपिंग के सिर पर बलूचिस्तान नरसंहार का पाप, मुनीर को नहीं छोड़ेंगे चीन-अमेरिका

नई दिल्ली। पाकिस्तान के पापों का घड़ा अब भर गया है। अब पाकिस्तान को मदद करने वाले देशों पर भी इल्जाम आने लगा है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। पाकिस्तान से हाल ही में आजाद हुए बलूचिस्तान ने बताया है कि बलूचिस्तान नरसंहार का पाप ट्रंप और जिनपिंग के सिर पर लग गया है। खत में बताया गया है कि पाकिस्तान को चीन-अमेरिका से आने वाली मदद किस तरह आतंकी हमले में इस्तेमाल हो रही है।इस खत में सुराब नरसंहार की वो इनसाइड स्टोरी शेयर की गई है,जिसे सुनने के बाद चीन-अमेरिका को आसिम मुनीर से सवाल पूछना ही पड़ेगा।
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने ट्रंप और जिनपिंग को जो खत भेजा है,उसमें खुलासा किया गया है कि उनकी दी हुई अरबों डॉलर की भीख और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल पाकिस्तानी फेल्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर बेगुनाह बलूच नागरिकों के नरसंहार में कर रहे हैं। बलूच नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर चीन और अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई तुरंत नहीं रोकी तो अत्याचार और भी भयावह होने वाले हैं।
ये खत 12 अगस्त को बलूचिस्तान के सुराब इलाके में हुई उस भयावह एयरस्ट्राइक के बाद सामने आया है,जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 30 बेकसूर बलूच नागरिकों की हत्या की गई थी। बलूच नेताओं ने सीधा आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना अपनी ही बेगुनाह जनता को कुचलने के लिए अमेरिका और चीन से मिले आधुनिक लड़ाकू विमानों और मिसाइलों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अपने खय में साफ लिखा है कि पाकिस्तान की सेना ने हमेशा की तरह इस बार भी पूरी दुनिया से झूठ बोला है। सुराब में हुई भयानक एयरस्ट्राइक को नकार कर पाकिस्तानी सेना ने सच को दबाने और झूठ फैलाने की नाकाम कोशिश की है।बलूच प्रतिनिधियों का कहना है कि 12 अगस्त को सुराब में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की धज्जियां उड़ाना है और ये युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
ख़त में दुनिया को याद दिलाया गया है कि पाकिस्तान का झूठ बोलने का इतिहास दशकों पुराना है। पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी और उसकी गतिविधियों को लेकर जॉर्ज डब्ल्यू बुश,बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी सरकारों को सालों तक अंधेरे में रखा और अरबों डॉलर की मदद ऐंठता रहा। ठीक उसी चालाकी से आज पाकिस्तान चीन को भी बलूचिस्तान की जमीनी हकीकत और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर बेवकूफ बना रहा है।जमीनी हकीकत तो ये है कि खुद पाकिस्तानी सेना शाम 6 बजे के बाद बलूचिस्तान की सड़कों पर उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाती और उसने वहां पूरी तरह से अपना कंट्रोल खो दिया है।
खत में अमेरिका की ट्रंप सरकार से अपील की गई है कि वो आतंकवाद की पौध तैयार करने वाली पाकिस्तान की भ्रष्ट और आतंकी सरकार पर अब एक पैसे का भी भरोसा न करे। बलूच प्रतिनिधियों ने अमेरिका को उसका बीता इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि 9/11 के बाद अफगानिस्तान में हजारों अमेरिकी सैनिकों की शहादत के पीछे इसी पाकिस्तानी सेना का दोहरा चरित्र रहा है।बलूच नेताओं ने वाशिंगटन से अपनी सैन्य सहायता नीति पर तुरंत रोक लगाने की मांग करते हुए कुछ हैरान करने वाले आंकड़े सामने रखे। 1983 से 1987 के बीच पीस गेट I और II प्रोग्राम के तहत अमेरिका ने पाकिस्तान को 40 F-16A/B फाइटर जेट्स सौंपे थे। 2006 में अमेरिका ने 18 नए F-16C/D ब्लॉक 52 विमान, 34 पुराने विमानों का आधुनिकीकरण (MLU), AIM-120C मिसाइलें और इंजन सपोर्ट सहित लगभग 5 बिलियन डॉलर के भारी-भरकम रक्षा सौदे को हरी झंडी दी थी।रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का कहना है कि अमेरिका ने जिन हथियारों को आतंकवाद से लड़ने के नाम पर दिया था, आज फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सेना उन्हीं F-16 विमानों और मिसाइलों का रुख बलूच नागरिकों की नस्लकुशी के लिए मोड़ चुकी है। खत में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी सीधे कटघरे में खड़ा किया गया है। 1960 के दशक से चीन द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही घातक सैन्य मदद का पूरा चिट्ठा खोलकर रख दिया गया है।
1970 के दशक की शुरुआत में चीन ने 200 मिलियन डॉलर के 165 MiG-19 विमान और भारी हथियार दिए थे,जिनका इस्तेमाल कोहिस्तान मारी और झालावान में बलूच स्वतंत्रता सेनानियों को बेरहमी से कुचलने के लिए किया गया। इसके बाद चीन ने F-7, A-5, K-8 जेट्स, मिसाइल सिस्टम दिए और पाकिस्तान के साथ मिलकर JF-17 थंडर लड़ाकू विमान तैयार किए, जो आज बलूचिस्तान पर बम बरसा रहे हैं।
2015 में चीन ने पाकिस्तान को लगभग 5 अरब डॉलर की लागत से 8 आधुनिक युआन-क्लास पनडुब्बियां देने की डील की।बलूच नेतृत्व ने बीजिंग को चेताया है कि वो तुरंत ये पक्का करे कि उसकी सैन्य तकनीक और फाइटर जेट्स का इस्तेमाल बलूचिस्तान की आजादी के आंदोलन को दबाने के लिए बिल्कुल न हो।
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के दो पावरफुल सदस्यों अमेरिका और चीन को साफ शब्दों में समझा दिया है कि पाकिस्तान और बलूचिस्तान दो पूरी तरह से अलग राष्ट्र हैं।पाकिस्तान का बलूचिस्तान की जमीन,उसके समंदर या उसके आसमान पर कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।दशकों से इस्लामाबाद के हुक्मरान विदेशी ताकतों से मिले हथियारों के दम पर बलूच कौम के खिलाफ स्टेट टेररिज्म चला रहे हैं।खत में दो टूक कहा गया है कि अगर अमेरिका,चीन या दुनिया का कोई भी देश बलूचिस्तान के प्राकृतिक खजानों,खनिजों, बंदरगाहों,एयरबेस या एनर्जी सेक्टर में निवेश करना चाहता है, तो उन्हें बलूच जनता और उनके असली प्रतिनिधियों से बात करनी होगी। किसी भी विदेशी ताकत को यह इजाजत नहीं दी जाएगी कि वो एक तरफ पाकिस्तान की काबिज सेना को हथियार दे और दूसरी तरफ बलूचिस्तान की दौलत को लूटे।
खत के आखिरी में अमेरिका,चीन और पूरी दुनिया से तुरंत कड़े कदम उठाने की मांग की गई है। पाकिस्तान को मिलने वाली हर उस मदद और हथियार की सप्लाई को तुरंत बंद किया जाए,जिसका इस्तेमाल मानवाधिकारों के हनन में हो रहा हो। एक इंटरनेशनल जांच कमेटी बनाई जाए जो ये तय करे कि पाकिस्तान को दिए गए विमानों और हथियारों का इस्तेमाल आम जनता पर न हो सके । दुनिया के तमाम देश बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में औपचारिक दर्जा दें। बता दें कि रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के इस खत ने साफ कर दिया है कि अब बलूच कौम चुप बैठने वाली नहीं है।अगर ट्रंप और जिनपिंग ने इस चेतावनी पर ध्यान दिया, तो पाकिस्तानी सेनापति असीम मुनीर के लिए अपनी नापाक हरकतों का जवाब देना भारी पड़ने वाला है।



