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राज्य नई दिल्ली

नई दिल्ली : ट्रंप की सच हुई भविष्यवाणी

$70 के करीब पहुंचा कच्चा तेल

 

नई दिल्ली । कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भविष्यवाणी और ब्रोकरेज के अनुमानों के मुताबिक कच्चे की कीमत 70 डॉलर के प्रति बैरल के करीब आ गई है।अमेरिका-ईरान की जंग से गहराई ग्लोबल टेंशन के दौरान तेल दुनिया को डरा रहा था और 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था,इससे पाकिस्तान,बांग्लादेश,ब्रिटेन से लेकर भारत तक में तेल संकट और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। अब स्थिति बदल चुकी है।अमेरिका और ईरान में जंग थम गई है,लेकिन विश्व की तेल जरूरत के 20 फीसदी की आपूर्ति के लिए अहम समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट अभी पूरी तरह खुला नहीं है,फिर भी तेल की कीमतें बिखरी हुई नजर आ रही हैं।ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कच्चे तेल की कीमत वाली भविष्यवाणी सच होती दिखी है,जबकि कच्चे तेल में कई ग्लोबल ब्रोकरेज के अनुमानों के मुताबिक गिरावट देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है।गुरुवार को अपडेटेड कच्चे तेल की कीमत पर नजर डालें तो इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 70.60 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। इसके अलावा ब्रेंट क्रूड ऑयल दाम फिसलकर 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया था।मर्बन क्रूड ऑयल प्राइस 65 डॉलर पर ट्रेड करता नजर आया। अमेरिका और ईरान में जंग जब चरम पर थी और कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रहा था,तो मई महीने में डोनाल्ड ट्रंप ने जंग खत्म होने से जुड़े सिग्नल दिए थे।ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था कि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी और ईरान युद्ध जल्द समाप्त होगा।ट्रंप ने भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि ईरान हमसे समझौते को बेताब है,वहां तेल का बड़ा भंडार है,ऐसा होने पर Crude Oil की ग्लोबल कीमतों में भारी गिरावट आएगी।ट्रंप के संकेतों के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने भी तेल की कीमतें गिरने का अनुमान जाहिर किए थे।एमके ग्लोबल ने कहा था कि 2027 की पहली छमाही के बाद कीमतों में गिरावट स्थायी आनी चाहिए और वित्त वर्ष के अंत तक तेल की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।ब्रोकरेज का ये अनुमान टाइमलाइन से बहुत पहले ही सच हो गया है। मई में ट्रंप ने तेल की कीमतें कम होने की भविष्यवाणी की थी और जून में अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर बात बनी।ट्रंप ने समझौते पर सहमति से जुड़ा बयान जारी किया कि अमेरिकी नाकाबंदी हटाई जा रही है और होर्मुज फिर से खुलने वाला है।ट्रंप के ऐलान के बाद अचानक कच्चे तेल की कीमत कम होती चला गईं और अगले ही दिन 80 डॉलर के आसपास आ गयी थी। अमेरिका और ईरान के ऐलान के बाद अचानक बीते दिनों फिर से दोनों देशों में जंग की खबर आई।ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए।इससे होर्मुज को लेकर टेंशन फिर से बढ़ी।हालांकि ताजा अपडेट देखें तो कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता में दोनों पक्ष अगली बैठक पर सहमत हुए हैं।कतर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कई मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है,इनमें होर्मुज भी शामिल है। बता दें कि अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध थमा है,लेकिन होर्मुज अभी भी पूरी तरह से खुला नहीं है।कुछ जहाजों की आवाजाही रिकॉर्ड की गई है,इसके बावजूद भी कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट की वजह देखें, तो तेल बाजार मौजूदा स्थिति के बजाय आने वाले समय की संभावनाओं के आधार पर कीमतें तय करता है।दोनों देशों की बातचीत में प्रगति से सप्लाई में रुकावट का खतरा भी कम हुआ है,जिसके बाद बाजार ने रिस्क प्रीमियम कम किया है,इसके अलावा OPEC+ प्रोडक्शन में बढ़ोतरी कर रहा है, ज्यादा उत्पादन से अधिक सप्लाई होती है और कीमतों पर दबाव पड़ता है।तमाम देशों ने जहां अपने स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व में बढ़ोतरी की है, तो वहीं UAE, सऊदी अरब जैसे तेल उत्पादक देशों के उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद से बाजार में सप्लाई सुचारू रहने की उम्मीद जागी है।

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