लखनऊ : राष्ट्रीय लोक अदालत में डिजिटल भुगतान की नई व्यवस्था बनी प्रभावी,18,661 चालानों का निस्तारण

लखनऊ ( विवेकानंद राय) । उत्तर प्रदेश की जिला न्यायपालिका में यातायात चालानों के ऑनलाइन भुगतान और त्वरित निस्तारण की दिशा में उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की नई डिजिटल पहल ने प्रभावी परिणाम दिए हैं। 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान उच्च न्यायालय द्वारा इन-हाउस विकसित ‘पेमेंट सेतु पोर्टल’ का प्रदेश के 74 जनपदों में एक साथ उपयोग प्रारंभ किया गया। इसके माध्यम से एक ही दिन में 18,661 यातायात चालानों का निस्तारण किया गया और 83,38,525 रुपए की धनराशि डिजिटल माध्यम से प्राप्त हुई। इस डिजिटल व्यवस्था की खासियत यह रही कि भुगतान पूरा होते ही रसीद स्वतः सृजित हुई और संबंधित पंजिकाओं में भी प्रविष्टि स्वतः दर्ज हो गई। इससे यातायात चालानों के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और कागजरहित हो गई। ‘पेमेंट सेतु पोर्टल’ डायनेमिक क्यूआर कोड प्रणाली पर आधारित है। न्यायालय द्वारा जुर्माने की धनराशि निर्धारित किए जाने के साथ ही पोर्टल संबंधित प्रकरण के लिए विशिष्ट क्यूआर कोड और भुगतान लिंक स्वतः तैयार करता है। यह लिंक संबंधित व्यक्ति के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सुरक्षित रूप से भेजा जाता है। नागरिक अपने मोबाइल फोन से यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकता है और भुगतान सफल होते ही रसीद भी सीधे मोबाइल पर प्राप्त हो जाती है। नई व्यवस्था से न्यायालय के काउंटर पर नकद धनराशि के लेन-देन, हस्तलिखित रसीद तैयार करने और बाद में होने वाली लेखा-मिलान प्रक्रिया की आवश्यकता समाप्त हो गई है। चालान, भुगतान और रसीद से संबंधित पूरी प्रक्रिया प्रारंभ से अंत तक डिजिटल रूप से अभिलिखित होती है। प्रत्येक लेन-देन का सत्यापन योग्य डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है। इस प्रकार यातायात चालानों के भुगतान और निस्तारण की प्रक्रिया को पूर्णतः पेपरलेस बनाया गया है।
इस पोर्टल का प्रदेश में सर्वाधिक उपयोग जनपद न्यायालय, गौतम बुद्ध नगर में किया गया। यहां 2,980 चालानों का निस्तारण करते हुए 10,42,973 रुपए की धनराशि डिजिटल माध्यम से प्राप्त हुई। चालानों की संख्या और प्राप्त धनराशि दोनों के लिहाज से गौतम बुद्ध नगर प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। इसके अतिरिक्त जनपद न्यायालय, लखनऊ में 1,198 तथा बलिया में 848 चालानों का डिजिटल माध्यम से निस्तारण किया गया। प्रत्येक जिला न्यायालय में ई-चालान के निस्तारण के लिए आने वाले नागरिकों को ई-सेवा केंद्र एवं सहायता पटल के माध्यम से आवश्यक जानकारी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके बाद संबंधित नागरिकों को उनके प्रकरण से जुड़े न्यायालय में भेजा गया। प्रत्येक जनपद न्यायालय की तकनीकी टीम पूरे दिन आवश्यक तकनीकी सहयोग के लिए उपलब्ध रही। पूरी व्यवस्था की निगरानी और समन्वय के लिए संयुक्त निबंधक (न्यायिक) (सी.पी.सी.) के कार्यालय में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष/वार रूम संचालित किया गया। इसके माध्यम से वास्तविक समय में विभिन्न जनपदों की स्थिति की निगरानी की गई और तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया गया। समर्पित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कनेक्टिविटी के जरिए जिला न्यायालय पूरे दिन उच्च न्यायालय के संपर्क में रहे।
नागरिकों तक डिजिटल भुगतान व्यवस्था से संबंधित आवश्यक जानकारी पहुंचाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी जोड़ा गया। साथ ही यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और पुलिस प्राधिकारियों के साथ राज्य स्तर पर समन्वय स्थापित किया गया, जिससे चालान संबंधी डेटा, भुगतान और रसीद की पूरी प्रक्रिया निर्बाध रूप से संचालित हो सके। उच्च न्यायालय की यह पहल ऐसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें काउंटर पर नकद लेन-देन की आवश्यकता नहीं है और अभिलेख पूरी तरह कागज रहित हैं। नागरिक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से कुछ ही क्षणों में भुगतान प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश की जिला न्यायपालिका में दक्षता, पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी-सक्षम न्यायिक प्रशासन को मजबूत करने के साथ ही यातायात चालानों एवं लघु अपराधों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है।




