मिर्जापुर : अहरौरा बांध बारिश से लेता बाढ़ का रौद्र रुप, कई गांव के लोग करते हैं पलायन, सुधार की जरूरत

तारा त्रिपाठी/मीरजापुर। स्वतंत्रता के बाद क्षेत्र सूखे की चपेट में था। सरकार द्वारा बांटे जा रहे मोटे अनाज से लोगों की जीविका चलती थी। खेत पथरीली और बंजर थे। चारो तरफ जंगली झाड़ियां थी। लोग झाड़ियों को काटकर और पथरीली जमीन को मिट्टी से पाटकर कृषि योग्य बनाये। जमीन तैयार हो जाने पर उसकी सिंचाई की समस्या आई। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ होने से बरसात का पानी टिक नहीं पाता था। नीचे खेत में बोई फसल को बहा ले जाता था। किसान हांथ मलता रह जाता था। इस समस्या से निजात पाने के लिए 1954 में सरकार की प्रथम पंचवर्षीय योजनान्तरगत अहरौरा के दक्षिण दिशा में उस समय के कृषि मंत्री रहे पं0 कमला पति त्रिपाठी ने अहरौरा बांध का निर्माण कराया। बांध में 23 फाटक के अलावा पानी निकासी के लिए दो सुलूस भी बनवाये गये । यह बांध पूरी तरह से सिंचाई के लिए बनवाया गया था। बांध की जल सम्भरण क्षमता 360 फीट की है। किसानों के खेतों की सिंचाई की समस्या काफी हद तक हल हो गई। सिंचाई की जरूरत होने पर बांध के फाटक खोले जाते अन्यथा बन्द रहते हैं। इस बांध से क्षेत्र के लगभग 40 गांवों की सिंचाई होने लगी और ब्लाक जमालपुर से चन्दौली जिले तक के गांव के खेतों की सिंचाई होने लगी। कुछ क्षेत्र के सिंचाई से वंचित रहने या फिर टेल तक पानी नहीं पहुंचने से लिखनियादरी जलप्रपात से एक हाईचैनल नहर निकालकर अहरौरा बांध की नहर से जोड़ दिया गया। अब सवाल यह उठता है कि अहरौरा बांध बरसात में बाढ़ का रौद्र रुप क्यों ले लेता है। आवश्यकतानुसार धीमी गति से सिंचाई के अनुरूप कम क्यूसेक पानी छोड़े जाने से सिंचाई सुचारु रुप से हो जाती है और मदारपुर गांव से चकियां को जोड़ने वाली सड़क पर बने पुल के नीचे से पानी निकल जाता है। आवागमन भी बाधित नहीं होता। किन्तु भारी बारिश में जब बांध का पानी खतरे के निसान यानी 360 फीट के ऊपर बहने को होता है तो बांध के कई फाटक खोलने पड़ते हैं। कभी कभी तो 23 सो फाटक खोलने पड़े हैं। उस समय बांध के तलहटी में बसे जमालपुर व चन्दौली के लठियां सहिजनी, डूहीं,मनउर, चौकियां, ढेबरा, हसौली, बहुआर तेतरियां खुर्द,तेतरियां कला, चोरमरवा, पाण्डेयपुर, चौबेपुर, उसके चपेट में आ जाते हैं। बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। गांव वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बाढ़ से प्रभावित लोग पलायन को बाध्य होते हैं। बरसात में यही बांध बाढ़ का रौद्र रुप ले लेता है और मदारपुर में बने पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है। चकियां जाने वाला मार्ग अवरूद्ध हो जाता है। आज भी बांध का एक फाटक खोलकर पानी निकाला जा रहा है। एसडीओ ऋतुराज पाण्डेय से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इस समय बांध का वाटर लेवल 358 फीट है। धीरे-धीरे पानी इसलिए निकालकर रहा हूं कि वाटर लेवल मेनटेन रहे ।जब पानी ओवरफ्लो हो जायेगा तो मुझे एक साथ कई फाटक खोलने पड़ेगे और तलहटी में बसे गांव बाढ़ की चपेट में आ जायेगे। मुझे बरसात बाद के लिए भी पानी सुरक्षित करना है और नीचे के गांव के लोगों को बाढ़ से भी बचाना है। अहरौरा बांध को तकनीकी रूप से सुधार की जरूरत है ताकि बरसात हो या फिर सामान्य मौसम बांध बाढ़ का रौद्र रुप न ले सके और सिंचाई का भी काम चलता रहे। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, प्रदेश महासचिव प्रह्लाद सिंह व डोगिया कैनाल अहरौरा के अध्यक्ष आत्मा प्रसाद त्रिपाठी ने बांध को तकनीकी रुप से सुधारे जाने के विचार का स्वागत करते हुए शासन से इसकी मरम्मत की मांग की है।



