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लखनऊ

लखनऊ : सीएम योगी ने किया गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ


लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रांगण में गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के पांचवें संस्करण का शुभारंभ किया। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से आयोजित यह नौ दिवसीय पुस्तक महोत्सव 12 से 20 सितंबर 2026 तक चलेगा। महोत्सव में पुस्तक प्रदर्शनी के साथ लेखक संवाद, संगोष्ठी, कवि सम्मेलन, व्याख्यान, पुस्तक विमोचन, क्विज, किस्सागोई सहित विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान के संकलित और लिपिबद्ध दस्तावेज हैं। मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है, क्योंकि उसके भीतर ज्ञान, विवेक और बुद्धि है। इन्हीं के माध्यम से विचारों का निर्माण होता है और विचारों का संकलन जब लिपिबद्ध होता है तो वह पुस्तक का रूप लेता है। मंत्री उपाध्याय ने कहा कि पुस्तकें हमारी मार्गदर्शक, मित्र और सलाहकार हैं। व्यक्ति की अनुभूति जब अभिव्यक्ति का रूप लेती है और लिपिबद्ध होती है तो वह पुस्तक बनती है। ऐसे पुस्तक महोत्सव अनुभूति और अभिव्यक्ति के दस्तावेजों के संकलन तथा नए रचनाकारों को मंच देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यहां होने वाली संगोष्ठियों, कवि सम्मेलनों, व्याख्यानों और पुस्तक विमोचन जैसे कार्यक्रमों से नए लेखकों को अपनी प्रतिभा और कृतित्व को सामने रखने का अवसर मिलता है।उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में जहां लोगों, विशेषकर नई पीढ़ी का पुस्तकों से जुड़ाव कम हो रहा है, वहीं ऐसे आयोजन बच्चों और युवाओं को पुनः पुस्तकों के करीब लाने का कार्य कर रहे हैं। पुस्तक मेलों में अलग-अलग विषयों और लेखकों की पुस्तकें एक स्थान पर उपलब्ध होती हैं, जिससे पाठकों में पढ़ने की रुचि और अध्ययन की आदत विकसित होती है। उन्होंने आयोजन के लिए राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा सभी आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ी को दिशा देने और प्रेरित करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि लखनऊ साहित्य, संस्कृति और कला की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। ऐसे में नौ दिवसीय यह ज्ञान महाकुंभ नई पीढ़ी को पुस्तक, साहित्य और अपनी संस्कृति से जोड़ने की दिशा में अभिनव प्रयास है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में विद्या को सभी धनों में श्रेष्ठ माना गया है। प्रारंभिक शिक्षा ज्ञान यात्रा की पहली सीढ़ी है और इस यात्रा का सबसे सहज एवं सशक्त साथी पुस्तक है। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में शिक्षा को केवल विद्यालय की चारदीवारी और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे युवाओं के सर्वांगीण विकास का आधार बनाया जा रहा है। पुस्तकालय इस अभियान के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय सार्वजनिक पुस्तकालयों के साथ-साथ विद्यालय पुस्तकालयों को भी निरंतर मजबूत और जनोपयोगी बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों को अब केवल किताबों के कमरे के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक आईटी उपकरणों, आरामदायक फर्नीचर और डिजिटल सुविधाओं से युक्त ज्ञान केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे सार्वजनिक पुस्तकालयों में पाठकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।

माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के विद्यालयों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए प्रोजेक्ट अलंकार योजना लागू की गई है। इसके तहत 2,107 सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में जर्जर भवनों का जीर्णोद्धार किया गया, और 591 सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी लाभ मिला। विद्यार्थियों में तकनीकी ज्ञान बढ़ाने के लिए 1,841 सरकारी विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,236 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित की गई हैं। भविष्य के लिए मार्गदर्शन हेतु 2,332 सरकारी विद्यालयों में करियर गाइडेंस कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए 2,435 सरकारी विद्यालयों में मिशन शक्ति के तहत आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने छात्रों से समय का सदुपयोग करने, नियमित दिनचर्या और कड़ी मेहनत पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने सकारात्मक सोच और साथियों के साथ रहने की सलाह दी। माता-पिता को बच्चों के साथ जुड़ने और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी, क्योंकि इससे सामाजिक जीवन प्रभावित होता है। छात्रों को मोबाइल का उपयोग केवल उपयोगी सामग्री देखने के लिए करना चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के चेयरमैन प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, अभिभावक, विद्यार्थी, लेखक, साहित्यकार एवं गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहे।

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