जेनज़ी के बाद जेन अल्फा ने हिला दीं सरकारों की चूलें
फतेहपुर से शुरू हुआ जेन अल्फा का प्रदर्शन पूरे देश में फैला, सीजेपी की स्कूल सुधारो मुहिम ने भी भाजपा सरकारों को परेशान किया, स्कूलों की फोटो और वीडियो बनाने पर रोक के आदेश से भड़के राजस्थान के कांग्रेस विधायक

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देश की आजादी के बाद पहला ऐसा मौका है कि शिक्षा भी एक मुद्दा बनकर उभरा है। पहले शिक्षा पर कोई सियासी दल बात नहीं करते थे। क्योंकि उनको लगता था कि इससे उनको वोट नहीं मिलते हैं। उनको तो वोट हिंदू-मुस्लिम, जाति, क्षेत्र, बाहुबल और पैसे के बल पर वोट मिल जाते हैं लेकिन जंतर-मंतर पर जेनज़ी ने प्रोटेस्ट कर शिक्षा को पूरे देश में मुद्दा बना दिया है। इसके बाद जेन अल्फा ने तो कमाल कर दिया है। जेन अल्फा ने भी अपनी आवाज फतेहपुर से ही उठाई।
सीजेआई के कॉक्रोच वाले बयान के बाद अमेरिका में पढ़ाई कर रहे अभिजीत दीपिके ने सोशल मीडिया पर कॉक्रोच जनता पार्टी बना दी। दीपिके ने नई दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सीधे जंतर-मंतर का रुख किया। यह आंदोलन नीट पेपर लीक और उसके बाद नीट लगभग 30 छात्र-छात्राओं की आत्महत्याओं को लेकर शुरू हुआ। संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की बर्बरता ने भी छात्रों के हौंसले तोड़ सकी। बाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना प़ड़ा। इसके बाद छात्रों ने बिहार में आंदोलन शुरू किया। वहां पर छात्रों पर चलाई गई एके 47 ने तो पूरे देश में बवाल मचा दिया। झारखंड में भी पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली पर छात्रों ने आंदोलन किया। वहां पर भी छात्रों को जीत मिली। इसके बाद सीजेपी ने स्कूल ठीक करो अभियान चलाया। इस अभियान के आगाज में ही सीजेपी कार्यकर्ता अब्दुल के पिता की बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने हत्या कर दी।
जेनज़ी को देखकर जेन अल्फा ने भी अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी। सबसे पहले फतेहपुर में स्कूल की बदहाली पर बच्चों ने आवाज उठाई। उसके बाद हमीरपुर, महोबा, उन्नाव, लखनऊ, कानपुर देहात, कन्नौज आदि जिलों में भी बच्चों ने अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाई। कन्नौज में तो बच्चों को समझाने के लिए प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण को भी आना पड़ा। उनके सामने भी बच्चे सेव माई फ्यूचर के पोस्टर लिए थे। महोबा में बच्चों ने प्रिंसिपल पर भेदभाव का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। लखनऊ में समाज कल्याण के स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर बच्चों को सड़क पर आना पड़ा। तमाम लोग सरकारी स्कूलों की कमियों पर फोटो बनाने लगे तो सरकार को इसे रोकने के लिए आदेश देना पड़ा। यहां तक कि राजस्थान में भी सरकार ने स्कूलों की फोटोग्राफी पर रोक लगा दी। इसके विरोध में राजस्थान में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा गेट पर प्रदर्शन किया। अभिजीत दीपके का कहना है कि यह मुहिम रूकेगी नहीं। स्कूलों को तो ठीक कराया जाएगा। शिक्षा और छात्रों के मुद्दे पर बिहार में राजद ने राजभवन तक कूच किया था। कांग्रेस तो पहले से ही छात्रों के मुद्दे को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर हमलावर है। सपा भी छात्रों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के साथ है।
इस तरह से शिक्षा के मुद्दे पर सभी विपक्षी पार्टियों को भजपा की केंद्र और प्रदेश की सरकारों को घेरने का मौका मिल गया है। पीएम मोदी ने जेनज़ी तक पहुंच बनाने के लिए सेल्फी बनाई और जेनज़ी स्टाइल में फ्रेंड्स भी बोला लेकिन इसका भी छात्रों पर कोई असर नहीं पड़ा। दिल्ली पुलिस की बर्बरता पर सुप्रीम कोर्ट को भी पुलिस के खिलाफ जांच के लिए कमेटी बनानी पड़ी। छात्रों के इन आंदोलनों का असर उनके अभिभावकों पर भी पड़ रहा है। उनको भी समझ में आने लगा है कि सियासत भावनात्मक नहीं, मुद्दों आधारित होनी चाहिए। इसी में सभी देशवासियों का भला है। अगर देश को विश्व गुरु बनाना है तो शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।



