वरिष्ठ आलोचक डॉ. प्रदीप सक्सेना को मिलेगा डॉ. रामविलास शर्मा सृजन सम्मान
उन्नाव में 11 अक्तूबर को आयोजित भव्य समारोह में किया जाएगा सम्मानित
कानपुर। डॉ. रामविलास शर्मा शोध-सृजन संस्थान, उन्नाव, उ.प्र. द्वारा वर्ष 2026 का ‘डॉ. रामविलास शर्मा सृजन सम्मान’ हिंदी के प्रतिष्ठित आलोचक, अनुवादक एवं संपादक डॉ. प्रदीप सक्सेना को प्रदान किया जाएगा। डॉ. प्रदीप सक्सेना को यह सम्मान संस्था द्वारा दिनांक 11 अक्टूबर 2026 को उन्नाव में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। इस आशय की घोषणा सम्मान समिति के संयोजक आनन्द शुक्ल की ओर से की गई है।
संस्था द्वारा इस वर्ष के सम्मान के लिए गठित चयन समिति के अध्यक्ष मधुरेश, सुप्रसिद्ध आलोचक एवं विचारक तथा सदस्य- प्रो. अमरनाथ, प्रतिष्ठित आलोचक एवं भाषाविद् तथा मुशर्रफ अली, प्रसिद्ध साहित्यकार एवं संपादक मंडल सदस्य, ‘उद्भावना’ ने सर्वसम्मति से डॉ. प्रदीप सक्सेना को सम्मानित करने का निर्णय किया है। विदित है कि यह सम्मान प्रतिवर्ष डॉ. रामविलास शर्मा की जयंती (10 अक्टूबर) को एक ऐसे विद्वान एवं सृजनधर्मी साहित्यकार को प्रदान किया जाता है जिसके कृतित्व ने भाषा, साहित्य, समाज एवं संस्कृति के क्षेत्र को समृद्ध किया हो। विगत वर्षों में यह सम्मान सुप्रसिद्ध आलोचक एवं विचारक प्रो. अमरनाथ, श्री कर्मेंदु शिशिर तथा प्रो. अवधेश प्रधान को प्रदान किया जा चुका है।
इस वर्ष सम्मानित डॉ. प्रदीप सक्सेना ( जन्म 1955, बदायूं) विगत चार दशकों से अधिक समय से कविता, कथा साहित्य, आलोचना, अनुवाद और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय और सृजनरत हैं। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहे हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं का संक्षिप्त विवरण है-
कविता : 7 लंबी कविताएं
उपन्यास: तहों के नीचे, कौवा टोला
आलोचना: इतिहास और आलोचना, 1857 और भारतीय नवजागरण, हमारे इतिहास में 1857, ग़दर आंदोलन, कम नहीं है असफल क्रांति का वैभव, काले सूरज की रोशनी, तिलिस्मी साहित्य का साम्राज्यवाद विरोधी- चरित्र, अनुवाद-दर्शन में अनुवाद-सैद्धांतिकी, 1857 महाक्रांति या महाविद्रोह, रस्मी अध्ययनों से परे, हमारी इतिहास-चेतना में दरारें आदि।
संपादन: पत्रिका विशेषांक- पहल 1857 निरंतरता और परिवर्तन, पहल इतिहास-अंक, उद्भावना- मार्क्सवादी आलोचना विशेषांक, उद्भावना महाविशेषांक- प्रतिरोध ही सौंदर्य है, उद्भावना- अक्तूबर क्रांति: रणभूमि में जन, बनास जन- मेघ : सौंदर्य चिंतन के वातायन।
संपादित ग्रंथ: आलोचना सदैव एक संभावना है (मधुरेश पर एकाग्र), कल हमारा है (प्रो. कुंवर पाल सिंह पर एकाग्र)
अनुवाद: इतिहास का सच और सच का इतिहास, 1857: एक अंग्रेज़ की डायरी (ब्रिटिश पत्रकार विलियम रसेल की डायरी), मार्क्स: भारतीय
इतिहास के अध्ययन सूत्र।

डॉ. प्रदीप सक्सेना जी को रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान तथा मलयज स्मृति आलोचना सम्मान आदि महत्वपूर्ण सम्मानों से विभूषित किया जा चुका है।



