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उत्तर प्रदेश

मिर्जापुर : खदानों में सुरक्षा के इंतजाम ही है मजदूरों की जान का कवच, मुआवजे से जिन्दगी नहीं लौटेगी


तारा त्रिपाठी/मीरजापुर। गत दिनों थाना अहरौरा अन्तर्गत ग्राम भगौतीदेई में स्थित एक पत्थर की खदान ने एक बार फिर मजदूरों को अपने काल के गाल में समा लिया। इसके पहले चाहे क्रेशर प्लान्ट हो, कटर प्लान्ट हो, पत्थर की खदानें हो कई मजदूरों को अपना शिकार बना चुके हैं। अब तक न जाने कितने मजदूरों के परिवार सड़क पर आ गये और न जाने कितनी माताओं की गोंद सूनी हो गई। न जाने कितनी महिलाओं की मांग धुल गई और न जाने कितने बच्चे अनाथ हुए। हर बार प्रशासन के कड़े तेवर देखने को मिलते हैं और नियम-कानून का सख्त रूप सामने आता है। ऐसा लगता है कि गैर कानूनी तौर व अवैध तरीके से संचालित क्रेशर, कटर प्लान्ट तथा खदाने अब बन्द हो जायेगे और अवैध धन्धी सलाखों के पीछे होगे किन्तु दूर तक की पहुंच, पैसे का खेल और राजनैतिक पकड़ के चलते जिन्दगी गवाने वाले मजदूरों की चिता की आग ठंड पड़ जाती है। फिर सामन्जस्य वादी क्रिया से चिड़िया बैठा कर सारे प्रकरण को ठंडा कर दिया जाता है। आखिर जगह-जगह से उठे यह सवाल कि मुआवजे से यदि किसी भी मजदूर की जिन्दगी वापस नहीं लाई जा सकती है तो पत्थर के खदानों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम से मजदूरों की जान का कवच क्यों नहीं बनाया जाता है। बार -बार की घटनाओं ने हमें आज तक सजग नहीं कर सका। कारोबारियों का रोजगार आगे बढ़ जाता है और मजदूर जिन्दगी से हांथ धोकर पिछड़ जाता है। लापरवाह व दुर्घटना के जिम्मेदार को जैसे-तैसे चिन्हित करके जेल तो भेज  दिया जात है किन्तु कुछ दिनों के ही बाद जब वह बाहर आ जाता है तो लगता है कि जिम्म्मेदारी तय हो जाने के बाद भी उसे उतनी सजा नहीं मिली जितनी कि उसे मिलनी चाहिए थी। खैर यह सच है कि सड़क पर दुर्घटना होने से आवागमन तो बन्द नहीं होता किन्तु कड़े नियम और व्यवस्था से उसमें कमी लाई जा सकती है।
जो आज हुआ, इसकी क्या गारन्टी है कि वो कल न ,हो किन्तु आंकड़े यह तय करते हैं कि हमारे इंतजाम से दुर्घटनाओं में कितनी कमी  आई। हमने कितने सुधार किये ।खदानों में होने वाली मौतें हर वर्ष बढ़ती ही जा रही है। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष अधिक मौते हुईं ।होनी कोई टाल नहीं सकता। व्यवसाय कोई रोक नहीं सकता किन्तु खदानों पर सुरक्षा के मुकम्मल इन्तजाम से होने वाली मौतें कम किये जा सकते हैं।इसके लिए प्रशासन को मुस्तैद होना पड़ेगा और बिना दबाव में सुरक्षा नियमों का पालन कराना होगा। नियम न मामने वालों के लीज निरस्त हो,क्रेशर सीज हो और कुछ ऐसे प्रतिबंध हो कि उनमें नियम -कानून को तोड़ने का साहस न पैदा हो सके।

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