गाजीपुर : बसुका गांव में सैकड़ों एकड़ धान की फसल हर साल होती है बर्बाद, नहीं मिलता मुवावजा

गाजीपुर ( विवेकानंद राय) । गंगा की बाढ़ जब अपना रौद्र रूप दिखाती है तो उसका सबसे बड़ा खामियाजा खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों को भुगतना पड़ता है। जिले के बसुका गांव के किसानों की पीड़ा सिर्फ बाढ़ तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि जब हर वर्ष बाढ़ उनकी सैकड़ों एकड़ धान की फसल को बर्बाद कर देती है, तो उनकी क्षति का सर्वे क्यों नहीं होता ? बसुका गांव में बाढ़ कोई नई आफत नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई दशकों से बरसात और गंगा के बढ़ते जलस्तर का पानी खेतों में पहुंचता है और देखते ही देखते किसानों की महीनों की मेहनत पानी में डूब जाती है। धान की तैयार होती फसल बर्बाद होती है, लागत डूब जाती है और किसान कर्ज तथा आर्थिक संकट के बीच खड़ा रह जाता है। विडंबना यह है कि फसल बर्बाद होने के बाद भी पीड़ित किसानों को न तो अपेक्षित मुआवजा मिल पाता है और न ही ऐसी कोई ठोस सरकारी मदद दिखाई देती है, जिससे उनकी आर्थिक क्षति की भरपाई हो सके। कई ग्रामीण अब इसे अपनी नियति मान चुके हैं। उनका कहना है कि बाढ़ आएगी, फसल बर्बाद होगी और उन्हें अपने नुकसान के साथ ही जीना पड़ेगा।
– बाढ़ से बड़ा सवाल है प्रशासनिक उदासीनता
बाढ़ आना प्राकृतिक आपदा हो सकती है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित किसानों की क्षति का आकलन करना प्रशासन की जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में बसुका के किसानों का सवाल बिल्कुल सीधा है। यदि उनकी फसलें वास्तव में बाढ़ से नष्ट हो रही हैं तो प्रशासन मौके पर पहुंचकर फसलों का सर्वे क्यों नहीं करा सकता । संबंधित विभाग यह पता लगाने की कोशिश नहीं कर सकता कि प्रत्येक वर्ष कितने किसान प्रभावित होते हैं और कितने क्षेत्रफल में फसल बर्बाद होती है। यदि सर्वे होगा, नुकसान का आंकलन होगा और पात्रता के अनुसार सरकारी नियमों के तहत कार्रवाई होगी, तभी किसानों को यह भरोसा मिलेगा कि सरकार और प्रशासन उनकी परेशानी को गंभीरता से ले रहे हैं। बाढ़ से निपटने के लिए हर वर्ष तैयारियां होती हैं। बाढ़ चौकियां बनाई जाती हैं, अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी जाती हैं और प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखने के निर्देश जारी होते हैं। लेकिन बसुका के किसानों का दर्द एक अहम सवाल खड़ा करता है—क्या बाढ़ प्रबंधन केवल पानी की निगरानी तक सीमित है या खेतों में बर्बाद हो रही फसलों की भी निगरानी होगी। जरूरत है कि जिला प्रशासन बसुका गांव को लेकर तत्काल स्थलीय जांच और फसल क्षति का सर्वे कराए। वास्तविक नुकसान सामने आए और यदि प्रभावित किसान सरकारी मानकों के अनुसार मुआवजे के पात्र हैं तो उन्हें नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाए।




