नई दिल्ली : मंत्री ए के शर्मा ने सातवीं एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया यूपी का स्वच्छ ऊर्जा विजन

नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित सातवें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 2026’ के ‘स्टेट मिनिस्टेरियल पिच’ सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ने प्रदेश के नवीकरणीय ऊर्जा विज़न और एग्रीवोल्टाइक्स (Agrivoltaics) रणनीति को प्रस्तुत किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का ‘फूड बाउल’ होने के साथ-साथ अब खेती की जमीन छीने बिना स्वच्छ ऊर्जा का भी प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि हमारा किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ भी बने। मंत्री ए के शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में सौर ऊर्जा क्रांति का विस्तार हुआ है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में स्वच्छ ऊर्जा को जन भागीदारी से जोड़ते हुए घरों की छतों से लेकर खेतों तक सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम कुसुम जैसी योजनाएं ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश इन पहलुओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन,किसानों के सशक्तिकरण और निवेश के नए अवसरों के सृजन में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है।
एग्रीवोल्टाइक विधि से एक ज़मीन, तीन परिणाम: खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और रोज़गार
मंत्री शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 3 करोड़ किसान खेती पर निर्भर हैं और राज्य की 80 प्रतिशत से अधिक कृषि जोत एक हेक्टेयर से छोटी है। प्रदेश में 22 GW सोलर क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में ‘एग्रीवोल्टाइक्स’ (ऊंचे सोलर पैनल्स के नीचे फसलों की खेती) एक रणनीतिक समाधान है, जिससे ‘एक खेत से दो फसलें—अनाज और बिजली’ प्राप्त होंगी। इससे एक ही ज़मीन से खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय रोज़गार के तीन बड़े उद्देश्य एक साथ सिद्ध होंगे। यह मॉडल खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
एडीबी सहायता और वाराणसी में पहला पायलट प्रोजेक्ट
उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसे एग्रीवोल्टाइक्स के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से तकनीकी सहायता (Technical Assistance) प्राप्त हुई है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIVR), वाराणसी में 100 किलोवाट क्षमता का एग्रीवोल्टाइक प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इसकी फिजिबिलिटी स्टडी पूरी हो चुकी है और अब यह क्रियान्वयन के चरण में है। यह परियोजना कृषि और सौर ऊर्जा के समन्वित उपयोग की संभावनाओं को समझने तथा भविष्य में इस मॉडल के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगी।
पीएम सूर्य घर (Rooftop Solar): उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। लगभग 9 लाख घरों में 3,018 MW रूफटॉप सोलर स्थापित हो चुके हैं और राज्य के आवंटन का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। पीएम-कुसुम (खेती का शौर्यीकरण): कंपोनेंट C1 में यूपी देश में नंबर-1 है, जिसके तहत 8,896 कृषि पंप (76.2 MW) सौर ऊर्जा से जोड़े जा चुके हैं। वहीं कंपोनेंट C2 में 581 सब-स्टेशनों पर 1,708 MW के पीपीए (PPA) हस्ताक्षरित किए गए हैं। यूटिलिटी-स्केल सोलर के अंतर्गत 3,098 MW क्षमता की परियोजनाएं चालू हैं तथा 6,295 MW (जिसमें 3,310 MW के सोलर पार्क शामिल हैं) क्रियान्वयन के अधीन हैं।इसके साथ ही बायो-एनर्जी (CBG): 42 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट्स (353 TPD क्षमता) के साथ उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी है।
विकसित यूपी @2047 के लक्ष्य में नवीकरणीय ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका
श्री शर्मा ने बताया कि ‘विकसित यूपी @2047’ के तहत राज्य ने वर्ष 2030 तक 32 GW और वर्ष 2047 तक 150 GW नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा घोषित ‘पीएम-कुसुम 2.0’ के तहत 10 GW एग्रीवोल्टाइक्स घटक में उत्तर प्रदेश अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऊर्जा मंत्री ने वैश्विक निवेशकों, डेवलपर्स और विशेषज्ञों को उत्तर प्रदेश के स्वच्छ ऊर्जा मिशन का साझीदार बनने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का प्रयास है कि स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ किसानों की आए बड़े ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और प्रदेश विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण योगदान दे।




