Slide 1
Slide 1
उत्तर प्रदेशवाराणसी

UP Varanasi News फोटोग्राफी में रघु राय जैसी दृष्टि जरूरी : डॉ. नागेंद्र 

अच्छी फोटोग्राफी के लिए अच्छा कैमरा होना जरूरी नहीं

Dr Shiv Yadav / Varanasi News

फोटोग्राफी की दुनिया में रघु राय एक कुशल जौहरी की तरह थे। एक रेडियो पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या अच्छी फोटो के लिए महंगे संसाधनों और लेंस की आवश्यकता होती है? इस पर रघु राय ने उत्तर दिया—“अच्छी लिखावट के लिए जरूरी नहीं कि कलम महंगी और सुंदर हो।” ये बातें बृहस्पतिवार को महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान और लाला दीनदयाल फोटो आर्ट सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्य वक्ता कला विज्ञ आर. गणेशन ने कहीं।बृहस्पतिवार को महान फोटोग्राफर पद्मश्री रघु राय और वाराणसी के फोटोग्राफर प्रदीप पांडेय ‘रवि’ को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत रघु राय और प्रदीप पांडेय ‘रवि’ के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर की गई। बीज वक्तव्य लाला दीनदयाल फोटो आर्ट सोसायटी के अध्यक्ष विनय रावल ने दिया। इस दौरान उन्होंने रघु राय के चित्रों का एक स्लाइड शो भी प्रस्तुत किया। मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि फोटोग्राफी के लिए दृष्टि की आवश्यकता होती है। इसी दृष्टि और जुनून ने रघु राय को बुलंदी तक पहुँचाया। कार्यक्रम में मशहूर फोटोग्राफर कृष्ण देव ने कहा कि फोटोग्राफी एक एप्लाइड आर्ट है। रघु राय ने ब्लैक एंड व्हाइट माध्यम से समाज को बहुत सहजता के साथ चित्रित किया, जो सरल और प्रभावशाली हैं। इस मौके पर आनंद बरनवाल ने कहा कि फोटोग्राफर अपने विषय से भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है। किसी भी तस्वीर को कैद करने के लिए उससे जुड़ना और उसके साथ रूबरू होना आवश्यक है। उदाती दादा ने कहा कि फोटोग्राफी का विषय समय और विचार के साथ बदलता रहता है। रघु राय ने आज़ादी की लड़ाई और उसके बाद के दौर को भी अपने लेंस में प्रभावशाली ढंग से कैद किया। वरिष्ठ पत्रकार अजय राय ने कहा कि रघु राय हर तस्वीर में एक जीवंत क्षण (मूवमेंट) को पकड़ते थे। उन्होंने कहा कि एक अच्छा फोटोग्राफर वही होता है, जो बड़ा सोचता है। रघु राय के संदर्भ में उन्होंने बताया कि वे कहा करते थे—“फोटो के लिए मैं बनारस और दिल्ली की गलियों में भटकता रहता हूँ। जो भटकता है, वही पाता है। उन्होंने बनारस को ‘सिटी ऑफ लाइट’ भी कहा। अजय राय ने प्रदीप पांडेय ‘रवि’ को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी संवेदनाओं को ‘ग्रे शेड’ की तरह गहन बताया। अपने उद्बोधन में गंगारविंद ने ‘रवि’ के साथ बिताए पलों को भावुक मन से याद किया। वहीं ओ.पी. चौबे ने रघु राय के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे हमेशा गले में कैमरा लटकाए रखते थे और लेंस खुला रखते थे। रघु राय का मानना था कि “100 में से 90 फोटो डिलीट करना सीखिए। इस अवसर पर वाराणसी के नामचीन पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने उनसे जुड़ी स्मृतियाँ साझा करते हुए फोटोग्राफी की विभिन्न विधाओं पर चर्चा की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान रंजन गौंड,रमेश पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन गणेश राय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रभा शंकर मिश्रा ने दिया।इस मौके पर डॉ वैष्णवी शुक्ला, डॉ.श्री राम त्रिपाठी, डॉ संतोष मिश्रा, रामात्मा श्रीवास्तव, डॉ जिनेश, डॉ मनोहरलाल, डॉ. शिवजी सिंह, नागेंद्र पाठक, अनिरुद्ध पांडेय आदि उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button